चंबा। शिक्षक अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसका खुलासा चंबा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की एडमिशन प्रक्रिया के दौरान हुआ है।
प्रदेशभर से एडमिशन के लिए पहुंचे प्रशिक्षुओं से काउंसलिंग के दौरान उनके अभिभावकों के रोजगार के बारे में जानकारी ली गई। अब तक हुई एडमिशन में करीब 50 फीसदी प्रशिक्षुओं के अभिभावक शिक्षक या प्रवक्ता पाए गए हैं।
इनमें कोई स्कूल में जेबीटी है तो कोई प्रवक्ता या कॉलेज में प्रोफेसर। खास बात यह है कि आमतौर पर यह धारणा रहती है कि डॉक्टर अपने बच्चों को डॉक्टर और शिक्षक अपने बच्चों को शिक्षक बनाना चाहते हैं लेकिन चंबा मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस एडमिशन में सामने आए आंकड़े इससे अलग तस्वीर दिखा रहे हैं।
अब तक एडमिशन लेने वाले प्रशिक्षुओं में करीब 10 फीसदी के अभिभावक ही डॉक्टर पाए गए हैं, जबकि 50 फीसदी प्रशिक्षुओं के अभिभावक शिक्षा विभाग से जुड़े हुए हैं।
वहीं, करीब 30 फीसदी प्रशिक्षुओं के अभिभावक कारोबारी, केमिस्ट, सेना और अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत हैं। ऐसे में एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले प्रशिक्षुओं में शिक्षकों के बच्चों की संख्या सबसे अधिक सामने आई है।
यह बात सही है कि एडमिशन प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों के बच्चे ज्यादा मिले हैं। यह अच्छी बात है कि शिक्षक अपने बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं में भेज रहे हैं। इससे आने वाले समय में प्रदेश में सेवाएं और बेहतर होंगी। डॉ. पंकज गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज चंबा