चंबा। वन विभाग में कई वर्षों से काम करने वाले दैनिक वेतन भोगियों को 30 दिन काम करने के बाद 15 दिन का वेतन दिया जा रहा है। इसके चलते इन कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। यह बात वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पवन कुमार ने कही। शनिवार को संघ की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि कई वर्षों से सेवाएं देने के उपरांत आज तक किसी भी सरकार ने उन्हें नियमित नहीं किया। खेद की बात यह है कि वन विभाग में श्रम कानूनों का धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है लेकिन कोई भी इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए आगे नहीं आ रहा है। जो दैनिक वेतन भोगी इसको लेकर आवाज उठाता है, उसे डरा-धमकाकर चुप करवा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वन विभाग में काम करने वाले मजदूरों का कोई भी रिकॉर्ड नहीं दिखाया जाता। ये कर्मचारी वर्षों से इसी आस से काम कर रहे हैं कि उनको नियमित किए जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में वन परिक्षेत्र अधिकारी मसरूंड ने नया फरमान जारी किया है। इसमें मजदूरों को कोटेशन लाने को कहा गया है जो श्रम कानून के बिल्कुल खिलाफ है। इसका कारण यह है की मजदूरों ने जब नियमित करने की मांग की तो विभाग ने खुद को बचाने के लिए इस तरह की हरकत की है। विभाग में नर्सरी में काम करने वालों के लिए कोई भी दुरुस्त प्रावधान नहीं है जबकि नर्सरी नियमित है उसी के आधार पर वन के कार्य चल रहे हैं।
हैरानी की बात है कि नर्सरी के ऊपर के सभी कर्मचारी नियमित हैं लेकिन जो लोग वन को लगाने के लिए पौधे तैयार करने डटे हैं उन्हें पूरी दिहाड़ी तक नहीं मिल रही है। यूनियन मांग करती है कि वन विभाग कोटेशन का फरमान वापस ले। कहा कि संघ जल्द अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलेगा और भविष्य में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। बैठक में सीटू महासचिव सुदेश ठाकुर विशेष रूप से मौजूद रहीं। इसके अलावा
बैठक में संघ के सचिव सुरेश, पवन, हेम राज, रविंद्र, चुहडू राम, कमली देवी, इंद्रा आदि शामिल रहे।