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सूही माता मेले पर कोरोना का साया

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चंबा। कोरोना की दूसरी लहर के चलते चंबा शहर के ऐतिहासिक सूही माता मेले के आयोजन पर संकट के बादल छा गए हैं। नगर परिषद चंबा मेले की तैयारियों को लेकर पांच अप्रैल को बैठक करेगी। इसमें मेले का स्वरूप और व्यवस्था के बारे में चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि मेले के आयोजन के दौरान परंपराओं से जुड़े लोगों को ही भाग लेने की अनुमति रहेगी। जबकि, भीड़ को मेले से दूर ही रखा जाएगा।
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यह दूसरा मौका होगा जब चंबा का ऐतिहासिक मेला चंद लोगों की उपस्थिति में ही होगा। वहीं, दूसरी तरफ लोग प्रशासन से इस बार मेला पुराने स्वरूप के तहत आयोजित करने की भी मांग उठा रहे हैं। सतेंद्र सिंह, राजेश कुमार, पूर्व सिंह, शक्ति सिंह आदि का तर्क है कि प्रदेश के अन्य जिलों में नगर निगम के चुनाव हो रहे हैं। बताया कि सूही माता मेले में दो से तीन सौ लोगों की उपस्थित रहती है। ऐसे में मेला पुराने स्वरूप के तहत ही आयोजित किया जाए। गौरतलब है कि गत वर्ष कोरोना महामारी के चलते परंपरा कायम रखने के उद्देश्य से ही मेला आयोजित किया गया था लेकिन इस साल भी मेले पर कोरोना का साया है। नगर परिषद चंबा की अध्यक्ष नीलम नैयर का कहना है कि मेले की तैयारियों को लेकर पांच अप्रैल को बैठक होगी। कहा कि मेला कोरोना गाइडलाइन के तहत ही आयोजित किया जाएगा। सीमित लोग ही मेले में भाग लेंगे।
इसलिए मनाया जाता है मेला
मान्यता है कि रानी सुनयना ने शहर में पानी की किल्लत दूर करने के लिए समाधि ले ली थी। रानी को एक स्वप्न आया था, जिसके बाद रानी ने समाधि ली थी। इसके बाद चंबा में पानी की किल्लत दूर हो गई थी। रानी सुनयना ने चंबावासियों के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण दे दिए थे।
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