कुत्ता कितना वफादार होता है। इसका उदाहरण इस खबर से लगा सकते हैं। मालिक की बर्फबारी के कारण मौत हो गई लेकिन वफादार कुत्ता चार दिन भूखा प्यासा शव की निगरानी करता रहा। पढ़ें पूरी खबर...
भरमाणी धार में दो युवाओं के साथ उनका कुत्ता भी फंसा था। चार दिन भूखे-प्यासे रहकर प्रचंड ठंड में वह अपने मालिक पीयूष (13) निवासी घरेड़ की रखवाली करता रहा। इस वफादारी की सब ओर चर्चा है। मंगलवार को जैसे ही बचाव दल हेलिकाप्टर से उतरा तो एक पेड़ के नीचे कुत्ते के भौंकने की आवाज सुनाई दी। नजदीक जाकर देखा तो पीयूष का शव वहां पड़ा था। जब वह उसके पास जाने लगे तो कुत्ते ने भौंकना शुरू कर दिया। चार दिन से यह कुत्ता मालिक की रखवाली कर रहा था। उसे तो यह भी पता नहीं था कि वह जिसकी रखवाली कर रहा है वह अब इस दुनिया से जा चुका है।
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बर्फ में कुत्ता कांप रहा था, लेकिन वह अपने मालिक के शव से दूर नहीं जा रहा था, ताकि उसे कोई भी छू न सके। इस मंजर को देखकर बचाव दल भी हैरान रह गया। उन्होंने सबसे पहले कुत्ते को पकड़कर उसका मुंह बांधा और उसे वहां से हटाया। इसके बाद पीयूष के शव को हेलिकाप्टर के जरिये भरमौर पहुंचाया। जहां पर स्थानीय लोगों ने जैसे ही उस शव को देखा तो उनकी आंखों से आंसू निकल आए।
जब उन्होंने कुत्ते की वफादारी सुनी तो वह उसे सहलाने लगे। जिस प्रकार से चार दिन से वह भूखा प्यासा अपने मालिक के पास बैठा हुआ था, उसे देखकर यही लग रहा था कि यदि कुछ दिन ओर बचाव दल वहां नहीं पहुंचता तो उसने भी मालिक के प्रति वफादारी में अपने प्राण त्याग देने थे।
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पीयूष के शव के पास बैठा कुत्ता।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
बर्फ ने बुझा दिए दो घरों के चिराग
भरमाणी धार में बर्फबारी के बीच फंसे दो युवकों की मौत से पूरे भरमौर में मातम है। इस घटना ने उपमंडल के घरेड़ और मलकोता गांव में बर्फबारी ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। घरेड़ के निवासी विक्रमजीत और नीलम को बेटे पीयूष (13) की मौत ने झकझोर दिया। वहीं, मलकोता की अनिता पति की मौत के बाद बेटे (19) विकसित राणा का कफन में लिपटा शव देखकर बेसुध हो गई।
दोनों का अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर को शव मिलने के बाद शाम को कर दिया गया। इस दौरान दोनों गांवों में मातम छाया रहा। पीयूष आठवीं कक्षा का छात्र था। उसके दो भाई और भी हैं। एक उससे छोटा तो एक बड़ा है। घरेड़ गांव के चूहडू राम ने बताया कि पीयूष काफी मिलनसार था। उसके पिता विक्रमजीत अकसर बीमार रहते हैं। माता नीलम कुमारी और भाई गणेश परिवार को पालन-पोषण करते हैं।
वहीं, दूसरी तरफ विकसित राणा उर्फ सींढू अपने परिवार में इकलौता बेटा था। डेढ़ साल पहले बीमारी के कारण उसके पिता संजय कुमार की मौत हो गई थी। घर में माता अनिता और दादी मां हैं। जैसे ही दोनों को उसकी मौत की खबर मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके बुढ़ापे का इकलौता सहारा भी उन्हें छोड़कर चला गया। पीयूष और विकसित राणा आपस में ममेरे भाई थी। दोनों को रील बनाने का शौक था।
इसी शौक के चलते वे दोनों 22 जनवरी को भरमाणी धार में गए थे। जहां पर बर्फबारी के बीच फंस गए। दोनों के परिवार उनके जिंदा लौटने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जो घर से अपने पैरों पर निकले थे, उन्हें अब कंधों पर लाया गया।
आखिर शब्द... हम जंगल में बर्फ के बीच फंसे, पीयूष की तबीयत ठीक नहीं
पीयूष की तबीयत काफी खराब हो गई है, मैं उसे जंगल पर छोड़कर मदद के लिए आ रहा हूं, लेकिन मुझे बर्फ में रास्ते का कुछ पता नहीं लग रहा है। यह बात विकसित राणा ने अपने मलकोता गांव के युवक के साथ फोन पर 23 जनवरी शाम 6 बजे आखिरी बार कही थी।
उसने यह भी कहा कि वे जंगल में बर्फ के बीच फंस चुके हैं, उन्हें मदद की जरूरत है। उसके बाद उसका फोन स्विच ऑफ हो गया। गांववासी उनकी तलाश करने के लिए जंगल की तरफ निकले, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण उन्हें बीच से वापस लौटना पड़ा। जहां पर उन्होंने रात बिताने के लिए 22 जनवरी को टेंट लगाया था, वह तेज अंधड़ की चपेट में आने से तहस नहस हो गया।
इसके चलते वह अपना टेंट और सामान वहीं छोड़कर जंगल की तरफ निकले, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका यह कदम उन्हें मौत के करीब ले जाएगा। यदि दोनों टेंट में रहकर बचाव दल के आने का इंतजार करते तो शायद उनके जिंदा बचने की संभावना हो सकती थी।
दोनों युवाओं ने मौके की परिस्थिति को भांपते हुए जंगल के रास्ते वापस घर के लिए लौटना सुरक्षित समझा, लेकिन अंधड़ में दोनों ऐसे फंसे कि जिंदा बाहर नहीं निकल पाए। पीयूष का शव एक पेड़ के नीचे पड़ा था तो विकसित राणा उससे थोड़ी दूर नाले पड़ा था, जो कि, बर्फ में गहरी खाई के खतरे को भांप नहीं पाया। दोनों युवाओं के शव इस बात की गवाही दे रहे थे कि जिंदा रहने के लिए उन्होंने कितनी जद्दोजहद की होगी।