डॉ. श्रेया वालिया
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
चंबा की बेटी श्रेया वालिया ने अपनी असाधारण मेहनत और लगन से मेडिकल ऑफिसर कमीशन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपने दिवंगत दादा-दादी के डॉक्टर बनने के सपने को हकीकत में बदल दिया है। चंबा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद, श्रेया ने लगातार एक साल तक हर दिन 12 घंटे की पढ़ाई की, जिसके बल पर उन्होंने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
कड़ी मेहनत और पारिवारिक सहयोग: श्रेया वालिया ने बताया कि मेडिकल अफसर बनने के लिए उन्होंने पूरी निष्ठा से तैयारी की। इस दौरान उन्हें अपने माता-पिता और बड़े भाई का भरपूर सहयोग मिला। पिता डॉ. सुरेश वालिया लोक निर्माण विभाग में अधिशासी अभियंता हैं, जबकि माता अंजू वालिया अध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। उनके बड़े भाई अंशुल वालिया एनआईटी हमीरपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर रहे हैं। परिवार के मार्गदर्शन ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
दादा-नाना का अधूरा सपना पूरा: श्रेया के दादा चुनी लाल वालिया और नाना ईश्वर दास कपूर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका एक ही सपना था कि श्रेया एक बेहतरीन डॉक्टर बनें। श्रेया ने अपने दादा-नाना के इस सपने को पूरा करने के लिए जीतोड़ मेहनत की। उन्होंने कहा कि चंबा मेडिकल कॉलेज में बिताए पांच साल उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे, और उन्हें वहां के प्राचार्य से लेकर सभी अध्यापकों का निरंतर सहयोग मिला।