मेडिकल कॉलेज में नहीं ओसीटी मशीन, रोजाना रेफर किए जा रहे 10 मरीज
निजी अस्पताल में 2000 से 3000 रुपये शुल्क देने पर किया जा रहा टेस्ट
आकांक्षी जिले के गरीब मरीजों को जांच के लिए टांडा पहुंचना हो रहा मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। आंखों के पर्दे की बीमारी की जांच के लिए मरीजों को चंबा से 200 किलोमीटर दूर टांडा रेफर किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में इस जांच को करने वाली ओसीटी मशीन अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है।
टांडा में भी मरीजों को उसकी रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। इस कारण मरीजों को टांडा जाने पर भी राहत नहीं मिल पा रही है। मजबूर होकर मरीजों को आंखो के पर्दे की ओसीटी मशीन से कराने के लिए निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। वहां उनसे टेस्ट के बदले में 2000 से 3000 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। गरीब परिवार से संबंध रखने वाले मरीजों के लिए यह शुल्क अदा करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, सरकारी अस्पताल में निम्न स्तर पर यह टेस्ट किया जाता है।
मेडिकल कॉलेज की नेत्र ओपीडी में रोजाना आंखों की बीमारी का इलाज कराने के लिए 100 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से 10 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें आंखों के पर्दे की बीमारी होती है, लेकिन उनकी बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर को उन्हें ओसीटी टेस्ट लिखना पड़ता है, जब मरीज सरकारी लैब में इस टेस्ट को कराने के लिए जाते हैं तो उन्हें मना कर दिया जाता है।
मधुमेह से रहती है कान का पर्दा खराब होने की संभावना
मधुमेह से पीड़ित मरीजों की आंखों का पर्दा खराब होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में उनकी नियमित जांच ओसीटी मशीन से करना अनिवार्य होता है, लेकिन चंबा में इन मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।
मेडिकल कॉलेज खुले छह वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां ओसीटी मशीन नहीं लगी है। इससे मरीज काफी परेशान हो रहे हैं। - सन्नी कुमार
जिस प्रकार से मेडिकल कॉलेज में अन्य मशीनें लगाई जा रही हैं, उसी तरह ओसीटी मशीन भी लगनी चाहिए। - राकेश कुमार
आकांक्षी जिले को ध्यान में रखकर सरकार और विभाग को यहां के मरीजों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। - रिशु ठाकुर
नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. आदित्य कश्यप ने बताया कि ओसीटी मशीन न होने से आंखों के पर्दे की बीमारी वाले मरीजों का इलाज करने में परेशानी हो रही है। इस संबंध में प्रबंधन को अवगत करवा दिया गया है। उधर, मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि सरकार के पास जरूरी मशीनों की डिमांड जा चुकी है। मशीनों की खरीद फरोख्त की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है।