फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chamba News: क्यूआर कोड स्कैन से खुल जाएगी वनस्पतियों की दुनिया

Wed, 17 Jun 2026 10:29 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
विज्ञापन
विज्ञापन
पर्यावरण चेतना केंद्र साहो की अनोखी पहल, विद्यार्थियों को मिलेगी जानकारी
विज्ञापन

क्यूआर कोड को करना होगा स्कैन, बिना विलंब मिल जाएगी समस्त जानकारी

संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। पर्यावरण चेतना केंद्र साहो ने अनोखी पहल की है। अब एक स्कैन से प्रकृति प्रेमियों, विद्यार्थियों को क्षेत्र में पाई जाने वाली लगभग 40 वृक्ष और पौधों की प्रजातियों की जानकारी मिलेगी।
विज्ञापन

इसके लिए डिस्प्ले पट्टिकाएं तैयार की हैं। इन पर संबंधित पौधे या वृक्ष का कॉमन नेम, स्थानीय नाम, वैज्ञानिक नाम और उसके एथ्नोबॉटैनिकल उपयोग का उल्लेख किया गया है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को अपने क्षेत्र की जैव विविधता एवं वनस्पति संपदा के बारे में सही एवं वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध करवाना है। यह पहल विशेष रूप से विद्यालयों के विद्यार्थियों, महाविद्यालयों में अध्ययनरत वनस्पति विज्ञान के स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों तथा वनस्पतियों और फ्लोरा में रुचि रखने वाले शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। अब उन्हें अपने आसपास मौजूद पौधों और वृक्षों के बारे में प्रमाणिक एवं व्यवस्थित जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त हो सकेगी। इस पहल की सबसे विशेष बात यह है कि प्रत्येक डिस्प्ले पट्टिका पर एक क्यूआर कोड (स्कैनर) भी लगाया गया है। कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल में गूगल लेंस अथवा किसी अन्य स्कैनर की सहायता से इसे स्कैन कर सीधे उस पौधे या वृक्ष के विस्तृत विवरण से जुड़ सकता है, जो उसे विकीपीडिया जैसे विश्वसनीय स्रोत तक पहुंचा देता है। इससे लोगों को केवल नाम ही नहीं, बल्कि उस प्रजाति के वर्गीकरण, वितरण, उपयोग, पारिस्थितिक महत्व तथा अन्य वैज्ञानिक तथ्यों की भी जानकारी आसानी से मिल जाती है।पर्यावरण चेतना केंद्र साहो का मानना है कि प्रकृति संरक्षण की शुरुआत ज्ञान से होती है। जब लोग अपने आसपास के पेड़-पौधों को पहचानेंगे, उनके महत्व को समझेंगे और उनसे जुड़ाव महसूस करेंगे, तभी जैव विविधता संरक्षण की दिशा में सार्थक प्रयास संभव हो सकेंगे। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से शुरू की गई यह पहल न केवल क्षेत्र के लिए एक मिसाल है, बल्कि अन्य संस्थाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। पर्यावरण चेतना केंद्र संस्था के संस्थापक रत्न चंद शर्मा ने बताया कि विद्यार्थियों और पर्यावरण प्रेमियों की सुविधा के लिए यह प्रयास किया गया है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें