चंबा। जिले के ऊपरी क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि से सेब के बगीचों को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे सेब भी दागी होने के आसार बन गए हैं।
बारिश या फिर ओलावृष्टि होने की सूरत में सेब की फसल को नुकसान हो सकता है। इससे बागवानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। बदलते मौसम को देखते हुए और दागी सेब को बचाने के लिए बागवानी विभाग ने फसल को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बागवानों को जरूरी सलाह दी है। विभाग ने कहा कि बागवान समय रहते मेंकोजैब दवाई का छिड़काव करें। यह भी सुझाव दिया है कि ओलावृष्टि के तुरंत बाद 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम या 600 ग्राम मेंकोजेब दवाई को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर सेब के पौधों पर छिड़काव करें। इससे ओलावृष्टि से सेब के फलों और पत्तियों को हुए नुकसान से बचाव होगा और संक्रमण कम होगा। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि हुई है और फल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहां 10 से 12 दिनों के भीतर 0.5 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव अवश्य कर लें। दवाइयों के छिड़काव से ओलावृष्टि से फसल को हुए नुकसान की भी काफी हद तक भरपाई की जा सकती है। साथ ही सेब दागी होने से भी बच सकेगा।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने बागवानों को सलाह दी कि 600 ग्राम मेंकोजैब का घोल बनाकर ही बगीचों में छिड़काव करना चाहिए। ऐसे मेंकोजैब जो पाउडर के रूप में उपलब्ध होते हैं, उनका अच्छा और असरदायक घोल बनाने के लिए उन्हें पहले थोड़े से पानी में अच्छी तरह मिलाकर पेड़ों पर छिड़काव करें। सेब की फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।