स्वेटर-टोपी बनाकर कमा रहीं आजीविका, 30 महिलाओं को भी दिया रोजगार
स्थानीय मेलों में स्टॉल लगाकर बेच रही हैं अपने तैयार किए उत्पाद
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। ग्राम पंचायत साहो की अंजू ने न केवल अपनी मेहनत से खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के लिए स्वरोजगार का रास्ता भी खोला।
स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने का बीड़ा उठाया। छोटे प्रयास से बड़ा बदलाव लाने वाली अंजू ने स्वेटर और टोपी बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे यह प्रयास इतना सफल हुआ कि आज अंजू केवल अपनी आजीविका नहीं चला रही हैं, बल्कि करीब 30 अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। उनका मॉडल साबित करता है कि मेहनत, लगन और सामूहिक सहयोग से कोई भी महिला न केवल आत्मनिर्भर बन सकती है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए अवसर भी पैदा कर सकती है। अंजू अपनी दुकान चला रही हैं और हाथों से बुनाई की पूरी सफाई करती हैं। वह स्थानीय मेलों और स्टॉल पर अपने बनाए स्वेटर और टोपी बेचती हैं जिससे उत्पादों की मांग और पहचान दोनों बढ़ी। सर्दियों में उनके उत्पादों की खास मांग रहती है जिससे उन्हें और उनके साथ काम करने वाली महिलाओं को लगातार रोजगार मिलता है।
उन्होंने केवल अपनी मेहनत से सफलता हासिल की, बल्कि महिलाओं को जोड़कर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। गांव-गांव जाकर उन्हें स्वयं सहायता समूह से जोड़ा और उनके लिए प्रशिक्षण और संसाधनों का इंतजाम किया। इससे सैकड़ों महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकीं और अब वे अपनी खुद की आजीविका चला रही हैं।