दो दशक से झौड़ा-गढ़ माता सड़क किनोट से आगे नहीं बढ़ी, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को तय करना पड़ रहा पैदल सफर
सड़क पूरी हो तो आसपास के गांवों में पर्यटन, होम-स्टे और स्थानीय कारोबार को मिल सकती है रफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
तेलका (चंबा)। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध गढ़ माता मंदिर धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
हर वर्ष जातर और अन्य अवसरों पर हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, लेकिन मंदिर तक सड़क सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें आज भी लंबा पैदल सफर करना पड़ रहा है।
गढ़ माता मंदिर को सड़क से जोड़ने का कार्य वर्ष 2006 के आसपास शुरू हुआ था। झौड़ा से मंदिर की ओर सड़क निर्माण शुरू होने के बाद करीब ढाई किलोमीटर सड़क किनोट तक पहुंची, लेकिन इसके आगे निर्माण कार्य रुक गया। करीब दो दशक बीतने के बाद भी सड़क मंदिर तक नहीं पहुंच पाई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण पूरा होने से दियोल, किनोट, अटालु, मदराणी, चिंगलाणु, शलदंर, कराउड़, चिहोट, भरेभूण और राजा का डेरा समेत आसपास के कई गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। सड़क सुविधा मिलने से क्षेत्र में होम-स्टे, स्थानीय उत्पादों, खान-पान और परिवहन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
वर्ष 2024 में जिला पर्यटन अधिकारी ने गढ़ माता क्षेत्र का दौरा कर पर्यटन विकास की संभावनाओं का जायजा लिया था। उस दौरान क्षेत्र में पर्यटन विकास का खाका तैयार कर सरकार के समक्ष भेजने और होम-स्टे विकसित करने की बात कही गई थी।
स्थानीय लोगों ने सरकार से सड़क निर्माण के लिए स्पष्ट कार्ययोजना, बजट और समयसीमा तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि पार्किंग, पेयजल, शौचालय और पैदल मार्ग जैसी सुविधाएं विकसित होने से गढ़ माता क्षेत्र पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।