चंबा। जमीन कहीं और, पता कहीं और का, इतना ही नहीं कई किसानों की मौत के बाद अब उनकी जमीन तलाश कर पैमाइश करना बड़ी चुनौती से कम नहीं हैं। जिला चंबा के 1,172 किसानों की जमीनों का सही पता लगाने में इस प्रकार की समस्या उत्पन्न हो रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों समेत उनकी जमीनों को तलाशना राजस्व विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। बार-बार दर्शाए गए पतों पर जाकर पता लगाने पर भी जमीनों की कोई भी स्टीक जानकारी नहीं मिल रही है। कुल मिला कर सही जमीन की पैमाइश करने को लेकर पेश आ रही परेशानियों ने अब राजस्व विभाग के कर्मियों को थका कर रख दिया है।
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश भर में किसानों की जमीनों की पैमाइश करवाने के बाद ही उनके खाते आधार कार्ड से जोड़कर ही उनके खातों में स्कीम के तहत 15वीं किस्त डाली जाएगी, लेकिन जिले में सबसे बड़ी चुनौतियां राजस्व विभाग के कर्मियों के समक्ष ऑनलाइन भरे गए जमीन संबंधी दस्तावेजों खातों-खतूनी, घरेलू पते समेत किसानों द्वारा स्वयं की भरी गई आधी अधूरी जानकारियां बन कर सामने आई हैं। जिला के विभिन्न उपमंडलाें के तहत चंबा में 355, चुराह में 253, सलूणी में 181, पांगी में 112, भटियात में 83, भरमौर में 38, होली में 23, सिहुंता में 10, भलेई में सात, धरवाला में तीन और ककीरा में एक किसान द्वारा सही जानकारियां नहीं भरी गई हैं। जिस वजह से अब राजस्व विभाग के कर्मियों को किसानों की जमीनों की पैमाइश करना जी का जंजाल बना हुआ है। विभागीय सूत्र खुलासा करते है कि किसानों द्वारा स्कीम के तहत लाभान्वित होने के लिए कई जगहों पर गांवों में स्थित जमीनों संबंधी दस्तावेज लगाकर शहर स्थित घरों के आधे-अधूरे पते भरे हुए हैं। इतना ही नहीं, कई किसानों की मृत्यु के बाद भी अब उनके नाम से योजना के तहत लाभ लेने के लिए आवेदन किए गए हैं। नतीजतन, विभागीय कर्मी भी अब बार-बार इन 1,172 लोगों का पता लगाते-लगाते थक चुके हैं।
ऐसे मिलता है योजना से लाभ
पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर चार महीने में 2,000 रुपये मिलते हैं, जो सालाना 6,000 रुपये है। यह पैसा हर साल तीन किस्तों अप्रैल-जुलाई, अगस्त-नवंबर और दिसंबर-मार्च में दिया जाता है। ये पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है।
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत जमीनों की पैमाइश के लिए जमीन संबंधी जानकारी, घर के पते सही नहीं भरे गए हैं। इतना ही नहीं, कई जगहों पर किसानों की मृत्यु तक हो चुकी है। जिस वजह से किसानों का पता लगाना विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। चंबा में 68,856 किसानों की जमीनों संबंधी पैमाइश करने के बाद अब भी 1,172 किसानों की पैमाइश करवाना विभागीय कर्मियों के लिए कड़ी चुनौती से कम नहीं हैं।
जगदीश चंद, जिला राजस्व अधिकारी