चंबा में सड़क के किनारे पैरापिट लगाने के नाम पर खानापूर्ति करने का आरोप
जमीन खोदकर पक्की नींव के बजाय ऊपर ही ढांचा रखकर भरी जा रही कंक्रीट
लोग बोले- नींव कमजोर होने से कम होने के बजाय बढ़ सकते हैं वाहन हादसे
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क के किनारे पैरापिट लगाने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
पैरापिट लगाते समय जमीन खोदकर पक्की नींव बनाने के बजाय ऊपर ही ढांचा रखकर कंक्रीट भरी जा रही है। यह देखने में भले ही सुंदर दिखाई दे लेकिन सुरक्षा की लिहाज से बेहद कमजोर साबित हो सकते हैं। सड़क के किनारे पैरापिट बनाने वाला लोहे का ढांचा रखा जा रहा है। इसमें मशीन के जरिये कंक्रीट डाली जा रही है। कुछ घंटों बाद ढांचे को खोल दिया जाता है और पैरापिट तैयार हो जाता है। पहले पत्थरों के पैरापिट भी नींव खोदकर बनाए जाते थे जिससे इनसे टकराने वाले वाहन खाई में न गिरें। मशीनों का युग नहीं था, तब लोक निर्माण विभाग तारकोल के खाली ड्रम सड़क के किनारे जमीन खोदकर पैरापिट के स्थान पर लगाता था। ड्रमों में मिट्टी भरी जाती थी। वे इतने मजबूत होते थे कि किसी वाहन के टकराने के बाद भी जमीन से नहीं उखड़ते थे। अब मशीनों के आधुनिक युग में जमीन को खोदे बिना ढांचा रखकर पैरापिट तैयार किए जा रहे हैं। यह हाल जिले की सभी सड़कों का है। ऐसे में वाहन दुर्घटनाएं कम होने की बजाय बढ़ सकती हैं।
उधर, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता जोगिंद्र शर्मा ने बताया कि चंबा मंडल में सड़क के किनारे बनाए जा रहे पैरापिट के निर्माण में पक्की नींव बनाने के ठेकेदारों को कड़े निर्देश दिए जाएंगे।
आधुनिकता के युग में लोगों की सुरक्षा में लापरवाही बरती जा रही है। विभाग को इसमें उचित कार्रवाई करनी चाहिए। - डिंपल
सरकार पैरापिट लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। ठेकेदार सुरक्षा को नजरअंदाज कर इसका निर्माण कर रहे हैं। - अजय कुमार
पैरापिट का निर्माण वाहन को सड़क से लुढ़कने से रोकने के लिए किया जाता है। मजबूती न होने से पैरापिट और वाहन गिर सकते हैं। -रिशु
जो ठेकेदार पैरापिट बनाने का कार्य कर रहे हैं। विभाग को सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी नींव पक्की हो। -विनोद कुमार