साहो (चंबा)। पारंपरिक हरी शिमला मिर्च की जगह इस बार किसानों ने लाल और पीली हाइब्रिड किस्मों की ओर रुख किया, और उनका यह फैसला अब मुनाफे में तब्दील हो रहा है। साहो, कीड़ी और लग्गा क्षेत्रों में किसान इन रंगीन किस्मों की खेती कर जालंधर और पठानकोट की मंडियों में अच्छी कीमतें हासिल की हैं। लाल और पीली शिमला मिर्च के दाम किसानों को इस बार 160 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। इससे किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। किसानों का कहना है कि इन हाइब्रिड किस्मों की मांग ज्यादा है और यह हरी शिमला मिर्च की तुलना में कहीं बेहतर दामों पर बिक रहीं हैं।
किसान बोले- होटल इंडस्ट्री में हाथों हाथ बिक रही फसल
किसान संजीव कुमार, नेक सिंह, हेमंत कुमार, राजू कुमार, जीवन कुमार और रजिंद्र कुमार ने बताया कि लाल और पीली शिमला मिर्च देखने में भी आकर्षक होती हैं और होटल इंडस्ट्री में इनकी ज्यादा मांग है। इसी वजह से इनके दाम भी अच्छे मिलते हैं। उद्यान विभाग भी ऐसी हाई वैल्यू क्रॉप्स की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में लाल और पीली शिमला मिर्च खेती से और अधिक किसान जुड़ सकते हैं।
मिंजर मेले में लगा स्टॉल
मिंजर मेले में भी इस बार लाल और पीली शिमला मिर्च आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। उद्यान विभाग ने मेले में विशेष स्टॉल लगाकर इन फसलों को प्रदर्शित किया है, जिससे लोग खासे प्रभावित नजर आ रहे हैं। स्टॉल पर विभागीय विशेषज्ञ बागवानों और किसानों को बता रहे हैं कि कैसे लाल और पीली शिमला मिर्च की खेती पारंपरिक हरी मिर्च की तुलना में अधिक लाभकारी सिद्ध हो रही है।
अब सिर्फ हरी शिमला मिर्च तक सीमित न रहें। लाल और पीली किस्में कम समय में ज्यादा मुनाफा दे रही हैं। हमारी कोशिश है कि अधिक से अधिक किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हों।
डॉ. प्रमोद शाह, उपनिदेशक, उद्यान विभाग चंबा