संगेड़ में दशहरा समापन अवसर पर पहुंचे भाजपा नेता राज सिंह को स्मृति चिंह देते क्लब पदाधिक
चंबा। रजेरा पंचायत के संगेड़ गांव में रामलीला मंचन का सिलसिला बीते साढ़े तीन दशक से लगातार जारी है और इसके पीछे सबसे बड़ा योगदान है रत्न चंद का, जो अब चौथी पीढ़ी के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। 1989 में उन्होंने गांव में रामलीला मंचन की शुरुआत की थी और तब से लेकर आज तक इसका संपूर्ण प्रबंधन स्वयं ही संभाल रहे हैं।
रामलीला के नौ दिनों तक रत्न चंद अपनी दिनचर्या पूरी तरह इस धार्मिक आयोजन को समर्पित कर देते हैं। इन दिनों वे स्टेज के पास ही जमीन पर सोते हैं, केवल एक समय भोजन करते हैं, जूते नहीं पहनते और घर पर आराम करने तक नहीं जाते। सुबह से शाम तक तैयारियों में लगे रहते हैं और रात को मंचन के दौरान कलाकारों को किरदारों की बारीकियां समझाते हैं।
रामलीला के दौरान किस कलाकार को कौन-सा किरदार निभाना है, इसका निर्णय रत्न चंद स्वयं करते हैं और कोई भी उनके निर्णय पर आपत्ति नहीं करता। उनकी निष्ठा और अनुशासन को देखकर पंचायत के अन्य युवा भी प्रेरित होकर इस रामलीला क्लब से जुड़ रहे हैं। यही कारण है कि पिछले 34-35 वर्षों से संगेड़ की रामलीला पूरे अनुशासन और परंपरा के साथ आयोजित की जा रही है।
संगेड़ गांव की रामलीला अब केवल स्थानीय आयोजन नहीं रह गई, बल्कि आसपास के गांवों से भी लोग इसे देखने आते हैं। रात्रि के समय मंचन देखने के लिए ग्रामीण बड़ी संख्या में जुटते हैं और इसे धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मानते हैं।
विजय दशमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया
वीरवार को रामलीला क्लब संगेड़ की ओर से विजय दशमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। खेल मैदान में स्थापित रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का वध भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे कलाकारों ने किया। बुराई के अंत का प्रतीक यह आयोजन देखने के लिए संगेड़ ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे और दशहरा पर्व के साक्षी बने।