चंबा। आपदा की स्थिति में प्रशासनिक त्वरित निर्णय क्षमता, विभागों के बीच समन्वय और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक रहती है। यह बात उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज के भूगोल विभाग की बीए तृतीय वर्ष की छात्राओं के साथ संवाद करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने छात्राओं को प्रशासनिक कार्यप्रणाली, आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी। उपायुक्त ने गत वर्ष श्री मणिमहेश यात्रा के दौरान प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए बताया कि बहु-विभागीय समन्वय से फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालना, उन्हें त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना, अस्थायी आश्रय एवं भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करना और मार्गों की शीघ्र बहाली प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही।
संवाद के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा ने आपदा के समय अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और राहत प्रबंधन की जानकारी दी। राजकीय महाविद्यालय चंबा के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत रमण रवि ने बताया कि 7 से 12 फरवरी तक चंबा ज़िले में बहु-आपदा संवेदनशीलता और जोखिम आकलन विषय पर क्षेत्रीय अध्ययन किया गया। डॉ. शालिनी शिखा, डॉ. अवध नारायण चौबे और डॉ. गणेश यादव के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने विभिन्न गांवों में सर्वेक्षण तथा भरमौर क्षेत्र में केस स्टडी के माध्यम से आपदा जोखिम और सामुदायिक लचीलेपन को समझा।