केवल सदस्यों की नियुक्ति से दूर नहीं होंगी मंदिर प्रबंधन की विसंगतियां, स्वतंत्र ट्रस्ट की मांग दोहराई
2015 में सरकारीकरण के बाद से श्रद्धालु उठा रहे हैं व्यवस्था बहाली की मांग: मंगलेश शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। ब्राह्मण प्रतिनिधि सभा के पूर्व प्रधान मंगलेश शर्मा ने श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ट्रस्ट में गैर सरकारी सदस्यों के मनोनयन पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के गठन के करीब साढ़े तीन वर्ष बाद विधायक की अनुशंसा पर जिला प्रशासन ने 13 गैर सरकारी सदस्यों का मनोनयन किया है। इससे मंदिर प्रबंधन से जुड़े मूल मुद्दों का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में मंदिर के सरकारीकरण के बाद प्रबंधन व्यवस्था में उत्पन्न विसंगतियों को लेकर श्रद्धालु नाराजगी जताते रहे हैं। कई बार ज्ञापन सौंपे गए और मामला समाचारों की सुर्खियां भी बना। ब्राह्मण प्रतिनिधि सभा सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने लगातार मंदिर की वर्ष 2015 से पहले की व्यवस्था बहाल कर स्वतंत्र निजी ट्रस्ट के गठन की मांग उठाई है। राज्यपाल के चंबा प्रवास के दौरान भी स्थानीय लोगों ने मंदिर प्रबंधन को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग रखी थी।
उन्होंने कहा कि केवल गैर सरकारी सदस्यों का मनोनयन करना ऊंट के मुंह में जीरा साबित होगा। उनका कहना था कि जब भलेई माता मंदिर स्वतंत्र प्रबंधन के तहत सफलतापूर्वक संचालित हो सकता है तो श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर को सरकारी नियंत्रण में रखने का औचित्य समझ से परे है। पुजारी वर्ग को ट्रस्ट के गैर सरकारी सदस्यों में शामिल नहीं किया गया जिससे मनोनयन की गंभीरता पर प्रश्न उठते हैं।