चंबा में पशु चराने के िलए परमिट बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते किसान।
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उपमंडल तीसा के जंगलों में पशुओं को चराने संबंधी परमिट रद्द किए जाने के वन विभाग के फैसले पर पशुपालक भड़क गए हैं। शुक्रवार को तीसा के पशुपालकों ने भाजपा जिला महामंत्री जय सिंह की अगुवाई में डीसी कार्यालय के बाहर आधा घंटा जमकर प्रदर्शन और धरना दिया। इस दौरान पशुपालकों ने वन विभाग के डीएफओ के खिलाफ नारेबाजी भी की। इसके बाद अपनी मांग के बारे में भाजपा जिला महामंत्री जय सिंह और भाजपा मंडल महासचिव चुराह मुनियान खान की अगुवाई में डीसी सुदेश मोख्टा को ज्ञापन सौंपा।
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि चुराह विधानसभा क्षेत्र में वन विभाग की ओर से स्थानीय लोगों को अपने पशु जंगलों में चराने के लिए परमिट दिए गए थे। इससे वे पशुओं को धार पर ले जाकर चराते थे। पशु पालन से ही वे अपने परिवार का गुजारा करते हैं, लेकिन बीते 16 मार्च को चंबा में हुई जिला परिषद की बैठक में तीसा क्षेत्र के एक जिला परिषद सदस्य ने गलत तथ्यों को पेश करते हुए वन विभाग से सभी लोगों के परमिट रद करने का आग्रह किया। इसके उपरांत वन विभाग ने सभी परमिट रद्द कर दिए। इसके चलते अब लोगों को अपने पशु चराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उनके पशुओं का जीवन भी खतरे में पड़ गया है। उन्होंने बताया कि वे बीते कई वर्षों से चरागाहों में पशु चरा रहे हैं। उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि जल्द वन विभाग द्वारा परमिट को रद्द करने के निर्णय को वापस लिया जाए। यदि पांच दिन के भीतर निर्णय वापस नहीं लिया गया तो वे अपने मवेशियों सहित वन विभाग और प्रशासन के कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे। इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और वन विभाग की होगी। प्रतिनिधिमंडल में दीनानाथ, लालदीन, भागू, ताजदीन, मंजूर सहित कई अन्य उपस्थित रहे। डीसी चंबा सुदेश मोख्टा ने बताया कि तीसा से पशुपालकों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था। प्रतिनिधिमंडल की मांग के अनुरूप वन विभाग के अरण्यपाल को इस पर त्वरित कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।