चंबा। शहर में बायोमेडिकल वेस्ट का सही निष्पादन नहीं करने वाली एक निजी लैब को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फटकार लगाई है। निरीक्षण के दौरान लैब के बाहर इस्तेमाल किए यूरिन के कंटेनर मिले। इसके लिए लैब संचालक को सख्त निर्देश दिए कि यदि भविष्य में दोबारा ये कंटेनर खुले में बिखरे पड़े मिले तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, नागरिक अस्पताल तीसा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साहो और शहर में संचालित सभी निजी लैबों में जाकर बायोमेडिकल निष्पादन की जांच की। सरकारी के बाद सुल्तानपुर में संचालित सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी इस टीम ने अपनी दबिश दी। सभी संचालकों को निर्देश दिए कि बायोमेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक तरीके से ही निष्पादन करें। ऐसा नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अस्पतालों का निरीक्षण करने के बाद टीम ने भगोत गांव में भी अपनी दबिश दी। वहां पर स्थानीय लोग आरोप लगा रहे थे कि अस्पतालों से बायोमेडिकल वेस्ट उनके गांव में फेंका जा रहा है। जब टीम के अधिकारियों ने वहां पड़े दवाई के अवशेषों की जांच की तो सामने आया कि यह वेस्ट नाली में बहकर यहां पहुंचा है। हालांकि उन्होंने उस बायोमेडिकल वेस्ट की जांच मेडिकल कॉलेज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों के साथ की। उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय प्रयोगशाला के प्रिंसिपल साइंटिफिक अधिकारी संजीव शर्मा ने बताया कि सरकारी व निजी अस्पतालों के साथ सभी प्रयोगशालाओं में बायोमेडिकल वेस्ट के निष्पादन की जांच की गई है। इसमें कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।