चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में एक साल से महिलाओं के प्रेग्नेंसी टेस्ट (यूपीडी) नहीं हो रहे हैं। इसकी वजह से महिलाओं को प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाने के लिए एसआरएल लैब या निजी लैबों में धक्के खाने पड़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशाला में यह टेस्ट मुफ्त किया जाता है। जबकि, निजी लैबों में इस टेस्ट को करवाने के लिए पचास रुपये शुल्क लिया जाता है। निजी लैबों में अन्य टेस्ट करवाने वाले मरीजों की भी भरमार रहती है जिसकी वजह से महिलाओं को अपने टेस्ट करवाने के लिए कई बार घंटों लाइन में भी खड़े होना पड़ता है। हैरानी इस बात की है कि एक साल से बंद पड़े टेस्ट को शुरू करवाने में मेडिकल कॉलेज प्रशासन गंभीर नहीं है। प्रेग्नेंसी का टेस्ट किसी भी हेल्थ सब सेंटर में करवाया जा सकता है। इतना मामूली सा टेस्ट मेडिकल कॉलेज में न होना लोगों की समझ से परे है।
प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेज में जहां बड़ी से बड़ी बीमारियों के टेस्ट किए जा रहे हैं वहीं, चंबा मेडिकल कॉलेज में महिलाओं की प्रेग्नेंसी चेक करने वाला मामूली टेस्ट भी नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर महिलाओं में रोष है। महिलाओं मीनाक्षी, शमशाद, रेखा और जरीना का कहना है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग महिलाओं को बेहतर और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे जरूर करते हैं लेकिन असलियत में महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।
हालात यह हैं कि निजी लैबों में प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाने के बाद जब महिलाएं गायनी की ओपीडी में पहुंचती हैं तो वहां पर उन्हें महिला विशेषज्ञ नहीं मिलते। चंबा मेडिकल कॉलेज में महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसके लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग दोनों जिम्मेवार हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर मोहन सिंह ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला लाया गया है। जल्द प्रेग्नेंसी टेस्ट शुरू करने की व्यवस्था की जाएगी।