सेल्फ फाइनेंस मोड में किए जाने की संभावित प्रक्रिया के बीच स्टाफ ने मांगी केंद्रीय वित्तीय सहायता
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। हिमाचल प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में संचालित बैचलर ऑफ वोकेशन (बीवॉक) कार्यक्रम को सेल्फ फाइनेंस मोड में किए जाने की संभावित प्रक्रिया के बीच इससे जुड़े स्टाफ ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
बीवॉक स्टाफ ने हमीरपुर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर को पत्र भेजकर केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय से कार्यक्रम के लिए वित्तीय सहायता दिलाने की मांग की है।
स्टाफ के अनुसार प्रदेश के करीब 20 सरकारी महाविद्यालयों में वर्ष 2017 से बीवॉक कार्यक्रम संचालित हो रहा है। इससे करीब 180 कर्मचारी जुड़े हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्नातक डिग्री के साथ रोजगारपरक और उद्योग आधारित कौशल उपलब्ध करवाना है।
पत्र में कहा गया है कि रिटेल मैनेजमेंट और हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म जैसे पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रहे हैं। ऐसे में कार्यक्रम को सेल्फ फाइनेंस मोड में करने से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
स्टाफ ने सांसद से आग्रह किया है कि वह मामला केंद्र सरकार और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के समक्ष उठाएं और बीवॉक के लिए स्थायी केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने की पहल करें। स्टाफ का कहना है कि कार्यक्रम को बंद करने या विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ डालने के बजाय इसे स्किल इंडिया के उद्देश्यों के अनुरूप केंद्रीय सहयोग से मजबूत किया जाना चाहिए।