मरीज निजी मेडिकल स्टोर से खरीदने को मजबूर, प्रबंधन नहीं दे पा रहा राहत
वायरल सीजन में मेडिकल कॉलेज में दवा का टोटा, मरीजों की सेहत पर पड़ रहा भारी
ओपीडी के बाहर लग रहीं लंबी कतारें, इलाज के लिए घंटों तक करना पड़ रहा इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। वायरल संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज में सबसे जरूरी दवाई की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में बुखार और दर्द के उपचार में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल दवा ही उपलब्ध नहीं है।
डिस्पेंसरी में जाने वाले मरीजों को खाली हाथ लौटाया जा रहा है। तीन दिन पहले वहां दवाई का स्टॉक खत्म हो चुका है। इस कारण मरीजों को अब निजी दवा स्टोरों में जाकर यह दवाई लेनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना 1000 की ओपीडी रहती है। इसमें 200 से अधिक मरीज वायरल का शिकार होकर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें मेडिसन और शिशु रोग ओपीडी के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। आपातकालीन कक्ष और रात में भी बुखार से पीड़ित मरीज मेडिकल कॉलेज में पहुंच रहे हैं। डॉक्टर मरीजों को बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल की दवाई लिख रहे हैं। यह उन्हें सरकारी दवा डिस्पेंसरी में नहीं मिल रही है।
डॉक्टर की पर्ची लेकर जब मरीज डिस्पेंसरी जा रहे हैं तो वहां दवाई खत्म होने का हवाला देकर खाली हाथ लौटाया जा रहा है। सरकार और प्रशासन को इसमें गंभीरता दिखानी चाहिए। - मनु ठाकुर
बुखार, सर्दी-जुकाम और शरीर में दर्द की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। पैरासिटामोल जैसी दवा नहीं होना अस्पताल की दवा आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। - उत्तम चंद
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वायरल सीजन में मरीजों की संख्या बढ़ने की पहले से संभावना रहती है तो अस्पताल प्रशासन ने जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक क्यों नहीं रखा। - रिंकू ठाकुर
सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए आने के बाद भी यदि सामान्य दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ें तो इसका सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ता है। - जगदीश कुमार
जब स्टोर में पैरासिटामोल का स्टॉक 50 फीसदी बचा था, तब उसकी सप्लाई का ऑर्डर कंपनी को दे दिया गया था। 16 जुलाई को दो लाख रुपये की दवा का ऑर्डर जा चुका है। कंपनी से इस संबंध में बात की जाएगी। - डॉक्टर मानिक सहगल, प्रवक्ता, मेडिकल कॉलेज