वाहन दुर्घटना या अन्य गंभीर मरीजों के लिए जरूरी होता है आइसीयू
जीवनदायिनी मशीनों के साथ उपलब्ध रहता है अलग से चिकित्सीय स्टाफ
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में मरीजों को आईसीयू की सुविधा नहीं मिल रही है। आपातकालीन परिस्थिति में मरीजों को टांडा रेफर किया जा रहा है।
सरकार ने भले ही मेडिकल कॉलेज खोल दिया हो लेकिन आज भी मरीजों को आईसीयू की सुविधा नहीं मिल रही है। जिले की पौने छह लाख आबादी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यहां निर्भर रहती है। मेडिकल कॉलेज को खुले छह साल हो चुके हैं। आज भी यहां आपातकालीन सेवाओं की दरकार है।
जब भी कोई दुर्घटना होती है तो घायलों को उपचार के लिए टांडा रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को भी रेफर किया जाता है। आईसीयू में वेंटिलेटर, मल्टी-पैरा मॉनिटर, इन्फ्यूजन और सिरिंज पंप, डिफाइब्रिलेटर, डायलिसिस मशीन और सक्शन मशीन उपलब्ध रहती है। ये सभी मशीनें मरीज को आपातकाल परिस्थिति में जीवनदायिनी सुविधा प्रदान करती हैं। लोगों में विनोद कुमार, चमन सिंह, हरबंश, सुरेंद्र कुमार, केवल कुमार, जितेंद्र, टेक चंद और रवि कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में आईसीयू की सुविधा होनी चाहिए। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में यदि मरीजों को यह सुविधा नहीं मिलेगी तो उन्हें टांडा या शिमला रेफर करने का क्रम चलता रहेगा। इस दिशा में सरकार और प्रशासन को सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।
उधर, मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि नए भवन में क्रिटिकल केयर यूनिट बन चुका है। आईसीयू से संबंधित सभी मशीनें स्थापित की जा रही हैं। स्टाफ की तैनाती के लिए सरकार से मांग की गई है। जल्द ही इस यूनिट को चालू करवा दिया जाएगा।
हर माह रेफर होते हैं 10 से 15 मरीज
हर माह चंबा से 10 से 15 मरीज टांडा रेफर होते हैं। कई मरीज इतना लंबा सफर तय नहीं कर पाते और उनकी बीच रास्ते में मौत हो जाती है।