चंबा। कभी-कभी इंसान अपनी ड्यूटी से ऊपर इंसानियत को रख देता है और अपने कर्तव्यों से इतना जुड़ जाता है कि वह समय, वेतन और अनुबंध को भूल भी जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है तीन ऐसे ऑपरेटरों की, जिन्होंने ऑक्सीजन प्लांट में अपनी सेवा को सर्वोपरि माना। अनुबंध समाप्त हुए तीन महीने हो चुके हैं, जेबें खाली हैं, मगर दिल अब भी मरीजों की धड़कनों के साथ धड़क रहा है।
चंबा मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन प्लांट के तीन ऑपरेटर राजेश, बालकृष्ण और सूरज यह दिखाते हैं कि अगर दिल में किसी काम को करने का जुनून हो, तो कोई भी कठिनाई आपको पीछे नहीं हटा सकती। जनवरी में उनका अनुबंध समाप्त हुआ, लेकिन उन्होंने खुद को एक असल योद्धा की तरह महसूस किया। उनकी ड्यूटी केवल मशीनों तक सीमित नहीं थी, बल्कि मरीजों की जिंदगी से जुड़ी हुई थी।
वे जानते हैं कि यदि ऑक्सीजन प्लांट ठप पड़ा, तो अस्पताल में भर्ती दर्जनों मरीजों की सांसें रुक सकती हैं। यही सोचकर उन्होंने खुद की जरूरतों से ऊपर मरीजों की जिंदगी को रखा। इन ऑपरेटरों का अनुबंध जनवरी में खत्म हो गया था। इसके बावजूद चिकित्सा अधीक्षक के अनुरोध पर वे लगातार कार्यरत हैं। हालांकि सरकार से अभी तक सेवा विस्तार संबंधी कोई आदेश भी नहीं आया है।
इतना ही नहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में प्रदेशभर में ऑपरेटरों की सेवाएं बहाल करने की घोषणा की थी, लेकिन चंबा मेडिकल कॉलेज को अब तक कोई अधिसूचना नहीं मिली। तीनों ऑपरेटरों ने मंगलवार को उपायुक्त मुकेश रेपसवाल से मिलकर अपनी समस्या रखी और सेवा विस्तार की मांग की। उपायुक्त ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मामले को प्राथमिकता के साथ सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।
मरीजों की सांसें नहीं रुकनी चाहिए
दिन-रात काम करने में जुटे राजेश, बालकृष्ण और सूरज ने कहा कि हमने सरकार से कई बार गुजारिश की कि हमारी सेवाओं को विस्तार की जाएं, लेकिन मरीजों की जिंदगी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हमारी तनख्वाह रुक सकती है, लेकिन मरीजों की सांसें नहीं रुकनी चाहिए।
उपायुक्त चंबा से मिलते ऑक्सीजन प्लांट ऑपरेटर। -स्रोत: जागरूक पाठक- फोटो : जिला सहकारी बैंक में आयोजित कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष को स्मृति चिन्ह देते डा. भूदेव राजपूत, व पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार।