दैनिक वेतन अवधि की ग्रेच्युटी पर सक्षम अधिकारी ने पूर्व कर्मचारी के हक में सुनाया फैसला
प्रार्थी रमेश चंद ने जून 1982 से 30 जून 2020 तक वन विभाग में 38 वर्षों तक दी थीं सेवाएं
सेवा काल की ग्रेच्युटी का कर दिया था भुगतान, नहीं जोड़ी गई थी दैनिक भोगी की अवधि
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चंबा जोन में भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के तहत सक्षम प्राधिकारी ने वन विभाग को अपने पूर्व कर्मचारी को बकाया ग्रेच्युटी और ब्याज समेत 4,85,911 रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
यह मामला तीसा और पांगी क्षेत्र से जुड़े ग्राम शौर, डाकघर पुरथी, तहसील पांगी निवासी रमेश चंद का है। उन्होंने वन मंडल अधिकारी पांगी स्थित किलाड़ के खिलाफ दैनिक वेतन भोगी सेवा अवधि की ग्रेच्युटी के लिए दावा किया था। प्रार्थी रमेश चंद ने जून 1982 से 30 जून 2020 तक वन विभाग में 38 वर्षों तक सेवाएं दी थीं। इसमें दैनिक वेतन भोगी और नियमित दोनों कार्यकाल शामिल थे।
विभाग ने उन्हें नियमित सेवा काल की ग्रेच्युटी के रूप में 3,52,482 रुपये का भुगतान किया था लेकिन दैनिक भोगी अवधि की ग्रेच्युटी नहीं दी थी। उन्होंने इस वर्ष जनवरी में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष न्याय की गुहार लगाई थी। अदालत की कार्रवाई के दौरान प्रतिवादी वन विभाग की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। ऐसे में प्राधिकारी ने मामले में एकतरफा आदेश पारित किया। फैसले में प्राधिकारी ने सर्वोच्च न्यायालय के नेत्रम साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य मामले का हवाला दिया। इसमें स्पष्ट कहा है कि नियमित होने से पूर्व दैनिक मजदूरी की अवधि को भी ग्रेच्युटी की गणना के लिए सेवा काल में जोड़ा जाना चाहिए। इस आधार पर प्रार्थी की 16 वर्ष और 8 महीने की दैनिक भोगी सेवा को 17 वर्ष मानकर उनकी आखिरी सैलरी 32,789 रुपये के हिसाब से गणना की गई। गणना के अनुसार दैनिक भोगी अवधि की मूल ग्रेच्युटी 3,21,584 रुपये बनती है। प्रार्थी के सेवानिवृत्त की तिथि 30 जून, 2020 से अब तक 5.11 वर्षों की अवधि के लिए 10 प्रतिशत वार्षिक की दर से 1,64,327 रुपये का साधारण ब्याज भी जोड़ा गया है। अब वन विभाग को 4,85,911 रुपये की राशि प्रार्थी को देनी होगी। जिला श्रम अधिकारी अनुराग शर्मा ने बताया कि दैनिक भोगी अवधि की ग्रेच्युटी के भुगतान का आदेश दिया गया है। विभाग को ब्याज सहित 4.85 लाख का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।