ओपीएस पाने के लिए कर्मचारी वेतन से जीपीएफ की करवा रहे कटौती : संजीव
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं और आर्थिक प्रबंधन की कमियों को छिपाने के लिए ओपीएस को खलनायक की तरह पेश कर रही है।
यह बात न्यू पेंशन स्कीम सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष संजीव गुलेरिया ने कही। प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि यह प्रचारित किया जा रहा है कि ओपीएस से सरकार पर 1600 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा है लेकिन सच्चाई यह है कि इसके बाद प्रदेश के सवा लाख कर्मचारी अपने वेतन से जीपीएफ की भारी-भरकम कटौती करवा रहे हैं। यह सारा पैसा सीधे सरकार के पास जमा हो रहा है। इसे सरकार विकास कार्यों और पूंजीगत व्यय के लिए इस्तेमाल कर सकती है। कर्मचारी अपने हाथ में आने वाले वेतन में कटौती सह रहे हैं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे।
एनपीएस के समय सरकार को हर कर्मचारी के मूल वेतन का 14 फीसदी हिस्सा अपनी जेब से देना पड़ता था। ओपीएस लागू होने के बाद अब सरकार को यह राशि हर महीने नहीं देनी पड़ रही है। यह सरकार के लिए एक बहुत बड़ी नकद बचत है। इसे सार्वजनिक विमर्श में जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
विपक्ष और कुछ विश्लेषक ओपीएस को आर्थिक बदहाली की वजह बताते हैं लेकिन पंजाब का उदाहरण उनकी पोल खोलता है। पंजाब में पिछले दो वर्षों से महंगाई भत्ता नहीं दिया गया है जबकि वहां अभी भी एनपीएस का ढांचा ही प्रभावी है। इससे सिद्ध होता है कि आर्थिक संकट का असली कारण खराब आर्थिक प्रबंधन, बढ़ता कर्ज और फिजूलखर्ची है न कि कर्मचारियों की पेंशन। सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन जीना कर्मचारी का हक है, इसे मुफ्त की रेवड़ी कहना बंद किया जाना चाहिए।