बनीखेत (चंबा)। प्रदेश के 151 सरकारी सीबीएसई स्कूलों में 1359 पदों को आउटसोर्स आधार पर भरने के फैसले का न्यूनतम पेंशन योजना (एनपीएस) 10 वर्ष से कम सेवाकाल वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजीव गुलेरिया ने विरोध किया है।
उन्होंने इस फैसले को प्रदेश के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ धोखा करार दिया। प्रेस वार्ता में डॉ. गुलेरिया ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन पदों पर हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से भर्ती की जा रही है। इनमें पांच हजार से 25 हजार रुपये तक मानदेय दिए जाने की बात सामने आई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि महंगाई के दौर में इतने कम मानदेय पर युवा अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे। उन्होंने सरकार से नियमित और स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि स्कूलों के अलावा जल शक्ति विभाग, लोक निर्माण विभाग और अन्य सरकारी विभागों में भी विभिन्न पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्तियां की जा रही हैं। जब कार्य स्थायी प्रकृति के हैं तो कर्मचारियों की नियुक्तियां अस्थायी आधार पर क्यों की जा रही हैं।
डॉ. गुलेरिया ने आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और सभी सरकारी पदों पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियमित नियुक्तियां की जाएं।
साथ ही कर्मचारियों के लिए समान काम-समान वेतन का सिद्धांत लागू करने और सेवा सुरक्षा के उचित नियम तय करने की मांग की।