चुराह (चंबा)। प्रदेश सरकार ने भले ही स्कूलों की दशा सुधारने के प्रयास किए हो, पर धरातल पर यह मुहिम नजर नहीं आ रही है। उपमंडल चुराह के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला खुशनगरी को सरकार ने मॉडल स्कूल का दर्जा तो दे दिया है लेकिन आज दिन तक यहां मॉडल स्कूल के जैसे सुविधाएं विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रही हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में सरकार की ओर से जिले के पांच स्कूलों को मॉडल बनाने का निर्णय लिया था।
अन्य स्कूल तो माॅडल बन गए हैं, लेकिन चुराह क्षेत्र का खुशनगरी स्कूल मॉडल नहीं बन पाया है। इसमें न तो बुनियादी ढांचा बदला गया न ही स्मार्ट क्लास रूम जैसी सुविधाएं मिल पाईं। इस बात को लेकर अभिभावकों और पंचायत प्रतिनिधियों में काफी रोष है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार मॉडल स्कूल जैसी सुविधाएं बच्चों को नहीं दे पाई है।
इनसेट
वर्ष 2010 में स्कूल को मॉडल स्कूल का दर्जा मिला था। मगर आज दिन तक स्कूल मॉडल नहीं बन पाया है। इससे बच्चों को परेशानियां हो रही हे।
बोध राज, समाजसेवी
मॉडल स्कूल में स्मार्ट क्लास रूम के साथ ऑनलाइन पढ़ाई, खेलकूद के लिए खिलाड़ियों को उपकरण आदि की व्यवस्था रहती है। मगर यह सुविधा खुशनगरी स्कूल में नहीं मिल पा रही है।
जाफर अली, स्थानीय निवासी
इस स्कूल में बच्चों की संख्या भी काफी अच्छी है। सरकार को मॉडल स्कूल जैसी सुविधा बच्चों को देनी चाहिए। ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकें।
आबिद हुसैन, स्थानीय निवासी
स्कूल के नाम के साथ महज मॉडल लगाकर सरकार ने अपना कार्य कर दिया है। जबकि सुविधाएं आज दिन तक कोई नहीं मिल पाई है। इससे बच्चों को असुविधा हो रही है।
जावेद खान, उप प्रधान पंचायत खुशनगरी
यह मामला ध्यान में नहीं है। इस बारे में उचित कदम उठाए जाएंगे और पूरी जानकारी ली जाएगी।
प्यार सिंह चाढ़क, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा चंबा