मणिमहेश, लाके वाली माता के दर्शन के बाद जताई थी बन्नी माता मंदिर जाने की इच्छा
हंसी-खुशी घर लौटने की चाहत रही परिवार की अधूरी, बेटी का शव लेकर लौटे वापस
रंजीत शर्मा
भरमौर (चंबा)। परिवार ने सोचा भी नहीं था कि आस्था की यह यात्रा उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगी। धर्मशाला से निकला परिवार पवित्र मणिमहेश, लाके वाली माता और बन्नी माता के दर्शन कर हंसी-खुशी घर लौट रहा था लेकिन ढकोग के समीप पहाड़ी से गिरे एक पत्थर ने 14 वर्षीय दीक्षिता की जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली।
रोते-बिलखते पिता नवदीप और मां बबीता देवी के अनुसार दीक्षिता ने यात्रा से लौटते वक्त बन्नी माता के दर्शन पर जाने की जिद की थी। परिवार उसकी इच्छा पूरी करने के लिए यात्रा पर निकला। मणिमहेश और लाके वाली माता के दर्शन के बाद सभी ने बन्नी माता मंदिर में भी माथा टेका। दर्शन के बाद परिवार दो गाड़ियों में वापस धर्मशाला लौट रहा थे। एक वाहन में दीक्षिता अपने परिजनों पिता नवदीप, माता बबीता देवी, बड़ी बहन जैनिका और चाचा के साथ सवार थी, जबकि दूसरे वाहन में उसके चाचा प्रदीप का परिवार यात्रा कर रहा था।
वापसी के दौरान ढकोग के समीप अचानक पहाड़ी से एक बड़ा पत्थर वाहन पर आ गिरा। हादसे में दीक्षिता गंभीर रूप से घायल हो गई। स्थानीय लोगों की मदद से मां-पिता और चाचा ने उसे भरमौर अस्पताल पहुंचाया। लेकिन, चिकित्सक उसे बचा नहीं सके। जिस बेटी के साथ परिवार घर लौटने की खुशियां संजो रहा था, उसी की पार्थिव देह लेकर लौटना पड़ा। कुछ घंटे पहले तक मंदिरों में गूंज रही प्रार्थनाएं अब मातम में बदल चुकी थीं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में इस हादसे से शोक की लहर है। दीक्षिता की मासूम मुस्कान, उसकी जिद और यात्रा की यादें अब परिवार के लिए ऐसी स्मृतियां बन गई हैं, जिन्हें वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।