उपायुक्त कार्यालय के सभागार में बैठक के दौरान मौजूद उपायुक्त डीसी राणा व अन्य अधिकारी।
- फोटो : Chamba
चंबा। जिले में अब अचानक या बरसात के सीजन में भारी बारिश के कारण नदी में जलस्तर और प्रवाह बढ़ने के खतरे की पूर्व चेतावनी को लेकर इंटीग्रेटेड चेतावनी मैकेनिज्म स्थापित होगा। वेब आधारित सिस्टम को नदी पर बने बांध के अलावा राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन केंद्र और जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन केंद्र से भी संचालित किया जा सकेगा।
उपायुक्त डीसी राणा ने बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए सटीक और प्रभावी व्यवस्था तैयार करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों की समीक्षा के लिए जिला आपदा प्रबंधन की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को विशेष तौर पर रावी बेसिन में स्थापित करने की दिशा में एनएचपीसी प्रबंधन ने काम भी शुरू कर दिया है।
इस आधुनिक सिस्टम को आईआईटी रुड़की के सहयोग से तैयार किया जाएगा। रावी बेसिन में बने एनएचपीसी के अलावा निजी जलविद्युत परियोजनाओं को भी इस व्यवस्था के साथ जोड़ा जाएगा। जिले के अन्य क्षेत्रों में निर्मित या निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं को भी इस तरह के अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की व्यवस्था तैयार करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के नए वॉर्निंग सिस्टम में सायरन के अलावा वॉइस मैसेज की व्यवस्था भी रहेगी। उपायुक्त ने बैठक में मौजूद जिले के सभी एसडीएम को भी अपने कार्यक्षेत्र के तहत संवेदनशील जगहों के अलावा नदियों पर बने पुलों के डाटा को जल्द अपडेट करने के लिए कहा। कहा कि आपदा के खतरे की पहचान और उससे निपटने की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहने से बचाव और राहत अभियान को बड़ी मदद मिलती है। डीसी ने कहा कि अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की उपलब्धता को जांचने के लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम की अध्यक्षता में कमेटी का भी गठन किया गया है। इस कमेटी में बिजली बोर्ड और जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता भी शामिल किए गए हैं। उपायुक्त ने बताया कि उपलब्ध सैटेलाइट आंकड़ों के मुताबिक रावी बेसिन के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के अलावा जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अलग-अलग आकार की ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं। ऐसे में यह खतरा हमेशा बना रहेगा और नदियों पर निर्मित या निर्माणाधीन परियोजनाओं और नदियों के किनारों पर रहने वाली आबादी नुकसान की जद में रहेगी। इस तरह के खतरे के आभास और उसकी समय पर चेतावनी नुकसान से बचने या उसे कम करने में सहायक साबित होती है।