चंबा। अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के सुअवसर के कई कार सेवक गवाह नहीं बन पाएंगे। जिला चंबा से वर्ष 1990 के सरचू में राम मंदिर को लेकर हुए आंदोलन में 26 कारसेवकों ने भाग लिया था।
इनमें से पांच कार सेवक अब इस दुनिया में नहीं हैं। कई लोग बाहरी जिलों में बस चुके हैं। कुछ परिवार अब इस पुण्य घड़ी के साक्षी बनेंगे। राम मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन करते हुए लाठियां और गोलियां खाने वाले कारसेवकों में से कई अब इस पल के साक्षी नहीं बन पाएंगे।
राम जन्म भूमि प्राण प्रतिष्ठा समिति चंबा-तीसा-नुरपूर जिलों के विभाग संयोजक डॉ. केशव वर्मा ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर छेड़े गए आंदोलन में जिला चंबा से भी कारसेवकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। इन कारसेवकों में जुलाहकड़ी निवासी वैष्णव दास, सपड़ी निवासी दीपक वर्मा, चौंतड़ा निवासी अजय कुमार ठाकुर, काहलो कियाणी निवासी जयराम, सरोल निवासी रविश महाजन अब इस दुनिया में नहीं हैं। सहदेव और प्रदीप वर्तमान में पालमपुर में तबादले हो चुके हैं। उस दौरान वे एनएचपीसी सुरंगानी में कार्यरत रहे। इसके अलावा ओबड़ी निवासी राज कमुार, अनिल महाजन इत्यादि ही अब अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के गवाह बन सकते हैं। बताया कि लाठियां खाने और गोलियाें से जैसे-तैसे बचकर और कठिन समय व्यतीत करने वाले ये कारसेवक सच्चे सिपाही हैं।