खज्जियार (चंबा)। इंजीनियर और डॉक्टर बनने की चीलबंगला समेत अन्य तीन पंचायतों के विद्यार्थियों का सपना पूरा नहीं हो रहा है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चीलबंगला में मेडिकल और नॉन मेडिकल विषय न होने से विद्यार्थियों को 30 से 40 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर बनीखेत और जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की मानें तो विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए कई बार शासन और प्रशासन से स्कूल में विज्ञान संकाय की कक्षाएं आरंभ करवाने की मांग उठाई गई है। बावजूद इसके अभी तक उसे पूरा नहीं किया जा सका है। ग्रामीणों का कहना है कि मेडिकल और नॉन मेडिकल शिक्षा ग्रहण करने के लिए उनके बच्चे किराये के कमरे में रह रहे हैं। इसके चलते अभिभावकों की जेब पर भी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ग्राम पंचायत चीलबंगला, द्रडा, पद्धरोटू और पंजोह के 30 विद्यार्थी मेडिकल और नॉन मेडिकल की शिक्षा ग्रहण करने के हैं। इसके चलते अभिभावकों को अपने बच्चों की चिंता सताने लगी है।
अभिभावकों सरोज कुमारी, मीना कुमारी, रेखा देवी, मनीष कुमार, रोशन लाल, राजेश कुमार, भवनेश कुमार और सुनीता देवी ने बताया कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चीलबंगला में मेडिकल और नॉन मेडिकल की कक्षाएं शुरू होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई करने के लिए मीलों सफर तय करने से छुटकारा मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि चीलबंगला स्कूल में साइंस की छोटी लैब है लेकिन आज तक मेडिकल और नॉन मेडिकल संकाय आरंभ न हो पाना समझ से परे है। अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से चीलबंगला में मेडिकल और नॉन मेडिकल विषय की सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है। स्कूल एसएमसी अध्यक्ष अमर चंद ने बताया कि इन पंचायतों के 25 से 30 तक बच्चे मेडिकल और नॉन मेडिकल विषय पढ़ने के इच्छुक हैं।
जिला उपनिदेशक प्यार सिंह चाढ़क ने बताया कि 15 से अधिक बच्चे मेडिकल और नॉन मेडिकल विषय पढ़ने के इच्छुक होने चाहिए। उसके बाद विद्यालय में कक्षाएं आरंभ करने के प्रयास किए जा सकते हैं।