विटामिन के इंजेक्शन के बाद टांग में पड़ गई थी पस, ऑपरेशन होना था जरूरी
ऐसी परिस्थिति में बच्चों के लिए नीकू की रहती है जरूरत, चंबा में नहीं सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में नीकू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) की सुविधा न होने से नवजात बच्चे को चंबा से टांडा रेफर किया गया।
नवजात को जन्म के बाद जरूरी विटामिन के इंजेक्शन लगाया गया था। जहां इंजेक्शन लगा था, वहां पस पड़ गई थी। ऐसे में जब परिजन बच्चे को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आए तो वहां विशेषज्ञों ने उन्हें समझाया कि यहां निकू की सुविधा नहीं है। ऐसे में बच्चे की टांग का ऑपरेशन करना खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए वे बच्चे को टांडा लेकर जाएं। परिजन इसी बात को लेकर बहस करने लगे कि इंजेक्शन यहां लगा था तो अब इलाज भी यहीं करना चाहिए। काफी देर विवाद के बाद परिजनों को नीकू के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने परिजनों को समझाया कि यदि बच्चे के गले में पस पड़ी होती और वह सांस नहीं ले पा रहा होता और चंबा से टांडा पहुंचने में भी समक्ष नहीं होता, तब भी जोखिम उठाकर यहां ऑपरेशन किया जा सकता था लेकिन बच्चे को यदि सुरक्षित टांडा पहुंचाया जा सकता है तो यहां उसकी टांग से पस निकालने के लिए जोखिम उठाने की जरूरत नहीं है। निकू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले या गंभीर रूप से बीमार शिशुओं के लिए 24 घंटे विशेषज्ञ देखभाल प्रदान करती है। इसमें वेंटिलेटर, इनक्यूबेटर, मॉनिटरिंग सिस्टम और निओनेटोलॉजिस्ट की टीम की ओर से की जाती है। यह उच्च संक्रमण-मुक्त वातावरण में कंगारू मदर केयर (केएमसी) जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करता है।
लगातार निगरानी के लिए रहती है मॉनिटर की सुविधा
अत्याधुनिक उपकरण जैसे सांस लेने के लिए वेंटिलेटर, रेस्पिरेटरी सपोर्ट और हृदय गति/ऑक्सीजन स्तर की लगातार निगरानी के लिए मॉनिटर की सुविधा भी रहती है। इनक्यूबेटर तापमान नियंत्रित रखने के लिए विशेष बेड जो गर्भ के वातावरण की नकल करते हैं जिससे शिशु को गर्माहट और सुरक्षा मिलती है।
मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉक्टर मानिक सहगल ने बताया कि चंबा में अभी तक नीकू की सुविधा नहीं है। नए भवन में यह सुविधा शुरू हो सकती है। यही वजह रही कि उस नवजात बच्चे को चंबा से टांडा रेफर करना पड़ा।