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Chamba News: स्वास्थ्य केंद्र मैहला में टंगा आदर्श का बोर्ड, इलाज नदारद

Wed, 22 Apr 2026 11:06 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मैहला:
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बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रही क्षेत्र की छह हजार की आबादी
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प्रतिनियुक्ति पर आने वाले डॉक्टर भी नहीं कर रहे स्वास्थ्य केंद्र का रुख
मरीज 20 किलोमीटर दूर चंबा जाने को मजबूर, रात में इलाज पूरी तरह ठप
भुवनेश सिंह
मैहला (चंबा)। कागजों में आदर्श का दर्जा पाने वाला मैहला स्वास्थ्य केंद्र चार महीनों से डॉक्टर के बिना सिर्फ इमारत बनकर रह गया है। यहां हर दिन इलाज नहीं, इंतजार मिलता है।
हर मरीज के साथ उम्मीद नहीं, मजबूरी चलती है। सुबह अस्पताल पहुंचने वाले कदम दोपहर तक चंबा की ओर मुड़ जाते हैं। रात होते ही यह खालीपन खतरे में बदल जाता है।
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करीब छह हजार की आबादी बुनियादी इलाज के लिए तरस रही है। हालात इतने खराब हैं कि प्रतिनियुक्ति पर आने वाले डॉक्टर भी अस्पताल का रुख नहीं करते हैं। मरीजों को मजबूरन 12 से 20 किलोमीटर दूर चंबा का रुख करना पड़ रहा है।
दिन : बुधवार, समय : सुबह 11 बजे, स्थान : आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मैहला। मरीज दवाई लेने अस्पताल पहुंचे तो देखा कि डॉक्टर ही नहीं है। बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता का इलाज करवाने वालों को मजबूरी में चंबा जाना पड़ा। अस्पताल में जाकर चतुर्थ श्रेणी से पता चला कि डॉक्टर नहीं आए हैं। दूरदराज से पैदल पहुंचे कड़ी धूप में उन्हें अपने बच्चों को 11:30 बजे चंबा ले जाना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार 31 दिसंबर 2025 के बाद से अस्पताल में डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई है। मैहला के साथ बंदला, फागड़ी, चड़ी और जांघी पंचायतों के लोग हर दिन उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन निराश होकर लौटना पड़ता है।
उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि चिकित्सक का पद रिक्त होने बारे सरकार को लिखा गया है। सरकार के आदेश पर जैसे ही चिकित्सक की तैनाती की जाएगी। आदर्श स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक में उसे तैनात किया जाएगा।

रात को बेटा बीमार हो गया। सुबह उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तो पता चला कि डॉक्टर नहीं हैं। बेटे की हालत काफी खराब थी। ऐसे में उसे चंबा ले जाना पड़ा। इससे काफी समय लगा। बेटे को कुछ हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता। - विनोद कुमार

बच्चों और बुजुर्गों को छोटी बीमारी के लिए भी चंबा ले जाना पड़ता है। आदर्श का टैग केवल दिखावा बनकर रह गया है जबकि जमीनी स्तर पर सुविधाएं शून्य हैं। नाम का ही अस्पताल रह गया है। - अक्षय जरयाल, तीमारदार

प्रतिनियुक्ति की बात सिर्फ कागजों में है। हमने तो कभी कोई बाहरी डॉक्टर यहां देखा ही नहीं। बीते चार माह से देख रहे हैं। लोगों को परेशानी होती है। कोई हादसा हो जाए तो समय पर उपचार नहीं मिलता है। - बीना देवी
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दिन के समय ही नहीं, बल्कि रात में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो तुरंत चंबा के लिए दौड़ लगानी पड़ती है जो कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। - दीपेश भारद्वाज

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