चंबा। अगर सीखने की लग्न हो तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती। चुराह क्षेत्र के भंजराडू गांव की निशा ने इस कहावत को सच करके दिखाया है। उन्होंने मोबाइल को गुरु बनाकर इसमें यूट्यूब और अन्य साधानों से पारंपरिक गद्दी ड्रेस सिलाई का हुनर सीखा। साथ ही इस हुनर को बुजुर्गाें के मार्गदर्शन से और निखारा। अब वह न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं।
निशा ने बताया कि शुरुआत में सिलाई का कोई अनुभव नहीं था। आर्थिक परिस्थितियों के कारण बाहर जाकर प्रशिक्षण लेना संभव नहीं था। ऐसे में मोबाइल फोन उनका शिक्षक बना। यू-ट्यूब और सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो देखकर उन्होंने गद्दी ड्रेस की बारीकियां समझीं।
साथ ही गांव के बुजुर्गों से पारंपरिक डिजाइन और पहनावे की जानकारी लेकर अपने काम को और निखारा। धीरे-धीरे निशा ने गद्दी ड्रेस, सलवार-कमीज और पारंपरिक परिधानों की सिलाई में दक्षता हासिल कर ली। आज उनके बनाए कपड़ों की मांग आसपास के गांवों में बढ़ रही है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है और घर की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। निशा अब गांव की अन्य पांच महिलाओं को भी सिलाई सिखा रही हैं। उनका कहना है कि अगर महिलाएं अपने हुनर को पहचान लें तो वे घर बैठे आत्मनिर्भर बन सकती हैं।