चंबा। चंबा जिला में क्षय रोग के खात्मे को लेकर पंचायती राज प्रतिनिधियों के अलावा गैर सरकारी संगठनों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उपायुक्त डीसी राणा ने यह बात बुधवार को उपायुक्त कार्यालय के सभागार में आयोजित जिला स्तरीय क्षय रोग उन्मूलन समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यह लक्ष्य तय किया है कि 2023 तक हिमाचल प्रदेश को क्षय रोग से मुक्त किया जाएगा। इस रोग को लेकर जहां आम जनमानस में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है, वहीं क्षय रोग की टेस्टिंग को भी बढ़ाना होगा। उन्होंने आयुर्वेद विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि जिला आयुर्वेद अस्पताल में स्थापित माइक्रोस्कोपिक सेंटर में भी क्षय रोग की टेस्टिंग को और बढ़ाया जाए।
उपायुक्त ने बताया कि सामान्य क्षय रोगी को अपने पोषण के लिए इलाज की अवधि के दौरान हर महीने 500 रुपये की राशि दी जाती है। एमडीआर रोगी के लिए यह राशि 1500 रुपये है। निजी मेडिकल प्रैक्टिशनर को टीबी उन्मूलन रोगी का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के साथ साझा करनी होगी। उपायुक्त ने कोविड- 19 के तहत अब तक उठाए गए कदमों की भी समीक्षा की। पंचायती राज चुनाव के दृष्टिगत भी जिला के विभिन्न उपमंडलों के एसडीएम, तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, खंड विकास अधिकारियों और पुलिस को पूरी निगरानी बरतने के भी निर्देश दिए गए हैं। हिम केयर योजना में पंजीकरण को 1 जनवरी से दोबारा शुरू किया गया है जो 31 मार्च तक चलेगा। इस योजना के साथ जिला के सभी पात्र परिवारों को जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। जिसमें ग्रामीण विकास और महिला एवं बाल विकास विभागों के अलावा पंचायती राज प्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।