चंबा। जिला चंबा में टीबी मरीजों की पहचान करने में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक और प्रशिक्षु अहम भूमिका निभाएंगे।
इसके लिए नेशनल टास्क फोर्स के चेयरमैन डॉक्टर अशोक शर्मा और विश्व स्वास्थ्य संगठन से आईं डॉक्टर आत्मिका ने दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में उन्हें जानकारी दी है। शिविर में चिकित्सकों, स्टाफ नर्स और एमबीबीएस प्रशिक्षुओं सहित इंटर्न को टीबी रोगी की पहचान करने से लेकर उसके बेहतर उपचार को लेकर जानकारी दी गई। टीबी रोगियों की पहचान के लिए शुरुआती लक्षण क्या हैं, उनकी आसानी से कैसे पहचान की जा सकती है। इसको लेकर भी जानकारी दी गई। टीबी मरीज के परिवार के सदस्यों को टीबी से कैसे बचाया जा सकता है। उसको लेकर भी प्रशिक्षण शिविर में बताया गया।
डॉक्टर अशोक शर्मा ने बताया कि टीबी मरीज के परिवार में रहने वाले सभी सदस्य किसी न किसी रूप में उसके संपर्क में आते रहते हैं। ऐसे में टीबी का संक्रमण परिवार के सदस्यों में भी फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में जिस परिवार में टीबी का मरीज निकले, उस परिवार के सदस्यों को भी टीबी की बीमारी के इलाज को लेकर जरूरी दवाई खिलानी पड़ती है। यह दवाई एक गोली के रूप में दी जाती है। इसे परिवार के सदस्यों को रूटीन में खाना पड़ता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर हरित पुरी ने बताया कि टीबी रोग को जड़ से खत्म करने और जिले को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से यह कार्यशाला करवाई गई है।
कार्यशाला में 40 चिकित्सक, 100 एमबीबीएस प्रशिक्षु, 80 स्टाफ नर्स सहित इंटर्न को मिलाकर कुल 300 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने भाग लिया। इन्हें टीबी रोगी की पहचान करने से लेकर उनके बेहतर इलाज को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर कपिल शर्मा ने बताया कि टीबी के छुपे हुए मरीजों की पहचान के करने के लिए चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों सहित एमबीबीएस प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण शिमला से आए नेशनल टास्क फोर्स के चेयरमैन ने दिया।