चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा की प्रयोगशाला में मरीजों के जरूरी टेस्ट नहीं हो रहे हैं। इसकी वजह यह हे कि प्रयोगशाला में टेस्ट करने वाली मशीन खराब हो चुकी है। इसके चलते मरीजों को निजी लैबों में महंगे दामों पर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। जबकि अस्पताल में मरीजों के टेस्ट निशुल्क होते हैं। या कम दरों पर टेस्ट किए जाते हैं।
चंबा मेडिकल कॉलेज की विभिन्न ओपीडी में रोजाना 1500 से 2000 तक मरीज जांच करवाने के लिए आते हैं। जबकि अस्पताल के विभिन्न वार्डों में 300 से अधिक मरीज भर्ती भी होंगे। इन मरीजों को डॉक्टर इलाज संबंधित जरूरी टेस्ट लिखते हैं। इन्हें करवाने के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। वहीं सबसे अधिक परेशानी गरीब और मध्यम वर्गीय तबकों को पेश आ रही है जो कि महंगे दामों पर टेस्ट नहीं करवा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज चंबा में एलएफटी, लिपिड प्रोफाइल, इलेक्ट्रोलाइट, सीबीसी सहित अन्य कई टेस्ट हैं, जोकि अस्पताल की नहीं हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में संचालित एमआरएल लैब में भी मरीजों के ये टेस्ट नहीं हो रहे हैं। यहां पर तैनात कर्मचारी भी मशीन खराब बता रहे हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को टेस्ट करवाने के लिए निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है। यहां पर मरीजों से टेस्ट करवाने के मनमाने दाम लिए जा रहे हैं।
हर प्रयोगशाला में टेस्ट को लेकर अपने-अपने दाम निर्धारित हैं। स्वास्थ्य विभाग का भी इसमें कोई नियंत्रण नहीं है। जिला मुख्यालय में संचालित रेडक्रॉस की प्रयोगशाला में मरीजों को कुछ राहत जरूर मिल रही है। क्योंकि वहां पर निजी लैबों के मुकाबले कम दामों पर टेस्ट किए जाते हैं।
मगर मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से एक लैब में सभी मरीजों के टेस्ट करना संभव नहीं हो पाता। मरीजों और तीमारदारों ने जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से मांग की है कि अस्पताल की प्रयोगशाला में मरीजों के टेस्ट करवाने की व्यवस्था की जाए।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि अस्पताल की प्रयोगशाला में खराब पड़ी मशीन को ठीक करवाने की व्यवस्था की जा रही है। जल्द ही मरीजों के सभी टेस्ट अस्पताल में होना शुरू हो जाएंगे।