चंबा। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चंबा डिपो में बसों की मरम्मत और रखरखाव में गंभीर समस्याएं आ रही हैं। डिपो में जहां एक तरफ कलपुर्जे उपलब्ध हैं तो मेकेनिकों की भारी कमी के कारण बसों की मरम्मत का कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है और परिणामस्वरूप, रूटों पर चलने वाली कई बसें बीच रास्ते में ही हांफ जातीं हैं। इससे यात्रियों को असुविधा हो रही है। चंबा डिपो में इस समय लगभग 150 के करीब बसें सेवाएं दे रही हैं, जो किसी न किसी रूट पर खराब हो रही हैं। वहीं, मरम्मत के इंतजार में तीन दर्जन से अधिक बसें धूल फांक रहीं हैं।
हैरानी की बात तो यहां यह है कि जो सामान कंडम हो चुका है। वह भी वर्कशॉप पर पड़ा है। कंडम टायरों के ढेर लगे हैं। 100 से अधिक खराब टायरों ने जगह रोकी हुई है। मेकेनिक न होने से एक बस की मरम्मत के लिए काफी समय लग रहा है। इससे रूटों के लिए बसें देरी से निकलती है। जल्दबाजी में बसों की मरम्मत से चलती बसों के टायर खुल रहे हैं तो वहीं, बीच सड़क पर हांफ रही है। वर्तमान में वर्कशॉप में सिर्फ छह के करीब मेकेनिक हैं जो कि, चंबा डिपो में बसों की मरम्मत करते हैं और 10 के करीब पद खाली हैं।
छत टूटी, बारिश में भर जाता है पानी
चंबा डिपो की वर्कशॉप की छत भी टूटी हुई है, जिसके नीचे मेकेनिक काम करने के लिए मजबूर हैं। खासकर बारिश के मौसम में, वर्कशॉप पानी से भर जाती है, जिससे काम करने में कठिनाई होती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
पद भरे जाएं तो मिलेगी सुरक्षित और समय पर सुविधा
बसों के खराब होने पर परेशानी झेल रहे लोगों का कहना है कि एचआरटीसी को तत्काल बसों की मरम्मत के लिए अतिरिक्त मेकेनिकों की भर्ती करनी चाहिए और वर्कशॉप की स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि यात्रियों को समय पर और सुरक्षित सेवा मिल सके। साथ ही, निगम को मरम्मत के कार्य में तेजी लाने के लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
बसों और मेकेनिकों की कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा और डिपो में आवश्यक स्टाफ और संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी।
शूगल सिंह, उप मंडलीय प्रबंधक, एचआरटीसी