तोस का गोठ में पगडंडी को जान जोखिम में डालकर पार कर रहे श्रद्धालु
एक-दूसरे का हाथ थामकर पार कर रहे कीचड़ और फिसलन भरा रास्ता
श्रद्धालु बोले- यात्रा शुरू होने से पहले नहीं बनाया रास्ता तो बिगड़ सकते हैं हालात
रंजीत शर्मा
भरमौर (चंबा)। मणिमहेश यात्रा मार्ग पर तोस का गोठ नामक स्थान पर श्रद्धालुओं की जरा सी चूक उनकी जान ले सकती है। पगडंडी से होकर श्रद्धालुओं को आवाजाही करनी पड़ रही है।
कीचड़ में फिसलन इतनी अधिक है कि एक दूसरे का हाथ थामकर निकलना पड़ रहा है। मणिमहेश यात्रा अभी तक अधिकारिक तौर पर शुरू नहीं हुई है लेकिन 100 से अधिक श्रद्धालु रोज मणिमहेश जा रहे हैं। इन्हें तोस का गोठ नामक स्थान को पार करना मुश्किल हो रहा है।
दो दिन पहले पहले संवाद न्यूज एजेंसी की टीम यात्रा मार्ग से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए हड़सर से डल झील रवाना हुई थी। डेढ़ किलोमीटर दूर मंजर ऐसा था कि श्रद्धालु खतरनाक ढांक को गिरते-संभलते पार कर रहे थे। यह वही स्थान है जहां पिछले साल आपदा के दौरान भारी भूस्खलन हुआ था। 10 मीटर का हिस्सा जमींदोज हो गया था। अभी भी हालात वैसे ही नजर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए पगडंडी वाला रास्ता बना है। बारिश होने पर फिसलन इतनी बढ़ जाती है कि अनियंत्रित होकर कोई भी खाई में जा गिरे।
डंडे के सहारे गुजर रहे पंजाब के श्रद्धालु मंजीत सिंह ने बताया कि यात्रा शुरू होने से पहले यदि बेहतर रास्ता नहीं बनाया तो हालात बिगड़ सकते हैं। यात्रा पूरी कर लौट रहे गुरदासपुर के अमरिंद्र सिंह ने बताया कि बारिश होने पर पगडंडी से गुजरना काफी मुश्किल हो रहा है। प्रशासन के पास अभी समय है, इसलिए यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग की हालत में सुधार करें। वहीं, कांगड़ा निवासी सुरेश कुमार भी वहां से अपने दोस्तों के साथ गुजर रहे थे। उन्होंने बताया कि विश्वभर में प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा में बेहतर सेवाओं के लिए विभिन्न तरह के टैक्स लिए जा रहे हैं लेकिन जिस प्रकार के हालात देखने को मिल रहे हैं, उसे देख सरकार और प्रशासन की लापरवाही नजर आती है। उधर, एडीएम विकास शर्मा ने बताया कि लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले तोस का गोठ में रास्ते को बेहतर बनाएं।