चंबा की मणिमहेश डल झील में स्नान करते श्रधालू।स्त्रोत:संवाद
भरमौर (चंबा)। मणिमहेश यात्रा के दौरान बांदर और भैरों घाटी श्रद्धालुओं की कठिन परीक्षा लेती है। पूरी यात्रा के दौरान यही दो स्थान ऐसे हैं, जहां यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ता है।
बांदर और भैरों घाटी का रास्ता खड़ी चढ़ाई के साथ घुमावदार है। श्रद्धालुओं को सीधे चलने के बजाय घूम-घूम कर चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। इससे काफी थकावट लगती है। कई श्रद्धालु यह चढ़ाई पूरा नहीं कर पाते। इस वजह से उन्हें यात्रा बीच में छोड़नी पड़ती है। अधिकतर श्रद्धालु भगवान शंकर के जयकारे लगाते हुए इस कठिन पढ़ाई को पार करके अगले पड़ाव पर पहुंचते हैं। जब श्रद्धालु सुंदरासी पहुंचते हैं तो वहां सारी थकावट दूर हो जाती है। सुंदरासी में प्रकृति की सुंदरता देख श्रद्धालु काफी आनंदित हो उठते हैं।
मणिमहेश यात्रा के दौरान बांदर घाटी के रास्ते होकर जाते समय श्रद्धालुओं को शिव घराट के दर्शन होते हैं। इसमें पत्थर के पहाड़ पर आटा चक्की की आवाज सुनाई देती है। भगवान शंकर के इस चमत्कार को देखने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन परीक्षा भी देनी पड़ती है। इसलिए श्रद्धालु यात्रा के दौरान इन दोनों रास्तों को सबसे कठिन मानते हैं। इन रास्तों पर चलते समय श्रद्धालु एक दूसरे का हाथ थामकर यात्रा करते हैं। महंत आकाश गिरि बताते हैं कि भगवान शंकर के चमत्कार देखने के लिए कठिन परीक्षा देनी ही पड़ती है। मणिमहेश के सभी पड़ावों पर रोजाना चमत्कार होते रहते हैं।