चंबा। कोरोना की दूसरी लहर के बीच एक माह से बस सेवाएं बंद पड़ी हैं। इससे निजी बस ऑपरेटरों को तीन करोड़ 96 लाख का नुकसान हुआ है। निजी बस ऑपरेटरों में मांगें पूरी न करने पर सरकार के प्रति रोष है। ऑपरेटरों ने साफ किया है कि पांच जून को होने वाली कैबिनेट की बैठक में उनकी मांगों को न माना गया तो मजबूरन उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ेगा। इस दौरान वह विरोध प्रदर्शन सहित चक्का तक जाम करने से पीछे नहीं हटेंगे।
गौरतलब है कि 132 निजी बसें जिले के दुर्गम और शहरी क्षेत्रों में दौड़ती हैं। कोरोना काल में वर्ष 2020 में भी ऑपरेटरों को करोड़ों का घाटा उठाना पड़ा है। ऐसे में अब कोरोना की दूसरी लहर में भी निजी बस ऑपरेटरों को खासा नुकसान हो रहा है।
एक माह से विभिन्न रूटों पर दौड़ने वाली बसों के पहिये थमे होने से प्रति बस ऑपरेटर को तीन लाख का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुल मिलाकर जिले में निजी बस ऑपरेटरों को अब तक तीन करोड़ 96 लाख का घाटा उठाना पड़ा है। वहीं, सरकार के समक्ष लंबे समय से निजी बस ऑपरेटर यूनियन विशेष पथ कर, पथ कर और कैप्टिल वर्किंग के तहत प्रति वर्ष दिए जाने वाले दो लाख ऋण की मांग उठा रही है। कैप्टिल वर्किंग के तहत पहले वर्ष निजी बस ऑपरेटरों से ब्याज न लेने, दूसरे वर्ष आधा ब्याज देने और तीसरे वर्ष पूरा ब्याज देने का प्रावधान होना था। इसके अलावा ये ऋण निजी बस ऑपरेटरों को चार सालों में चुकता करना था। बावजूद इसके अब सरकार मांग को पूरा नहीं कर रही है। इससे निजी बस ऑपरेटर स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
जिला के दर्जनों दुर्गम रूटों पर केवल निजी बसें ही चलती हैं। इससे दूरदराज के ग्रामीण बसों के माध्यम से शहर का रुख कर पाते हैं।
निजी बस ऑपरेटर यूनियन प्रधान रवि महाजन सहित अन्य पदाधिकारियों चंद्रकांत भारद्वाज, जर्मसिंह ठाकुर, विवेक ठाकुर, राजीव शर्मा, रफी अहमद ने कहा कि उनकी तीन जायज मांगें हैं। मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को उनकी मांगों को मान कर उनकी समस्याओं को कम करना चाहिए। कहा कि पांच मई को कैबिनेट की बैठक में उनके पक्ष में निर्णय न होने पर वे सड़कों पर उतरने, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।