चंबा। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों का तीन स्तरीय मैकेनिज्म के तहत मनोबल बढ़ाया जा रहा है। संक्रमित आने के बाद मरीज में मानसिक तनाव न हो और उसका मनोबल बना रहे, इसके लिए जिला प्रशासन ने थ्री मैकेनिज्म के तहत कोरोना संक्रमित मरीजों का मनोबल बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। इसके तहत जिला मुख्यालयों और उपमंडल स्तर पर बनाए गए बनाए गए कंट्रोल रूम से रोजाना संक्रमित मरीजों से फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना जाता है। साथ ही उन्हें कोरोना संक्रमण पर जल्द जीत दर्ज करने का भी हौसला दिया जाता है। इसी क्रम में पंचायत प्रतिनिधि आशा और आंगनबाड़ी वर्कर भी घर-द्वार पहुंचकर संक्रमित मरीजों का फीडबैक हासिल कर उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं। कुल मिलाकर वैश्विक महामारी से पीड़ित लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने एक शानदार पहल की है।
गौरतलब है कि जिले में अब तक नौ हजार से अधिक लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। वहीं, 1024 संक्रमित लोग कोविड केयर सेंटर और होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने वाले लोगों के प्रति अन्य लोगों के रवैये को लेकर उनका मनोबल टूटने लगता है, जिससे वे तनावग्रस्त भी हो सकते हैं। इसको लेकर प्रशासन ने संक्रमितों का मनोबल बढ़ाने के लिए ही थ्री मैकेनिज्म प्रणाली को अपनाया है। इसके तहत रोजाना 15 से 20 संक्रमित लोगों से फोन से बात कर उनका कुशलक्षेम जानने के अलावा उन्हें किसी प्रकार की परेशानी, उनकी स्थिति में सुधार, उचित डाइट और समय पर दवाइयां लेने की जानकारी मुहैया करवाई जा रही है। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के जरिये संक्रमितों को योग के लाभ भी बताए जा रहे हैं।
कंट्रोल रूम में पहुंच रही शिकायतें
जिला मुख्यालय और उपमंडल स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रूमों में अक्सर संक्रमित मरीजों के सार्वजनिक स्थलों पर घूमने की शिकायतें पहुंच रही हैं। इनमें से अधिकांश शिकायतें आसपड़ोस के लोग कर रहे हैं। पड़ोसियों को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि अब संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ भी हो चुका है। जिला कंट्रोल रूम में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अब तक चार हजार से अधिक कॉल्स आ चुकी हैं। इनमें कोरोना मरीजों की शिकायतों संबंधी कई कॉल्स शामिल हैं। जिला और सबडिविजन पर बनाए गए कंट्रोल रूम में 24 घंटे फोनकॉल्स की सुविधा रहती है।
उधर, एडीएम मुकेश रेपस्वाल ने बताया कि कोरोना संक्रमितों का मनोबल बढ़ाने के लिए थ्री मैकेनिज्म के तहत कार्य किया जा रहा है। विभिन्न टीमें फोन और संक्रमितों के घरद्वार पहुंच कर उनका मनोबल बढ़ा रही हैं।