चंबा। जिले के 42 सरकारी स्कूलों पर ताले लटक गए हैं। सरकार ने इन स्कूलों को अन्य विद्यालयों में मर्ज कर दिया है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या मापदंडों के अनुसार न होने पर यह कार्रवाई सरकार ने की है।
बहरहाल, अब इन स्कूलों का तमाम इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित स्टाफ जरूरतमंद स्कूलों को दिया जाएगा। इससे अब अन्य स्कूलों में बेहतर व्यवस्थाएं होंगी। सरकार की ओर से इस तरह का कदम उठाने का मकसद सरकारी स्कूलों में बेहतर व्यवस्था बनाना है, जिससे स्कूली विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जानकारी के अनुसार शून्य इनरोलमेंट वाले चार स्कूल इसमें शामिल हैं। 38 स्कूलों वे है, जहां बच्चों की संख्या एक से पांच के मध्य है। गौरतलब है कि सरकार ने कम संख्या वाले स्कूलों को मर्ज करने को लेकर पहले विभागीय अधिकारियों से पत्राचार शुरू कर दिया था। सरकार का मानना था कि कम संख्या वाले बच्चों में भी उतना स्टाफ तैनात है, जितना अधिक इनरोलमेंट वाले स्कूलों में है। ऐसे में सरकार ने इन स्कूलों को मर्ज करने की योजना बनाई। इसके तहत अब इन स्कूलों को मर्ज कर दिया गया है।
ये स्कूल हुए हैं मर्ज
शून्य इनरोलमेंट वाले स्कूलों में प्राइमरी स्कूल बलमूंही, भटलारी, सुनकर और न्याग्रां को मर्ज किया गया है। एक से पांच संख्या वाले स्कूलों में संचूई, पालिन, धनोड़, पंजसेही, थनार, बन्नी, डल्ली, डणून, मंझली, छतरैल, तलेरू, चलेरा, खडांदर, दुड़धाला, भौंठ, खनौरा, डुहका, चुआरा, कोपरू, डडरियारू, धोणी, लुहानी, जुवांन, भुजनाली, टौ, मंजवास, मिकाम, हिलतवान, चलासनी, कुहांड, धार, बनोई, अनेन, चेली, तियारी, मंगलोन, खलोल, लवणौता, पलानी स्कूलों को मर्ज किया गया है।
कार्यवाहक प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक ज्ञान चंद ने बताया कि 42 स्कूलों को मर्ज किया गया है। कहा कि तैनात स्टाफ को अन्य जगह तैनात किया जाएगा।