रास्ते में बसें खराब होने से यात्रियों के लिए डर का दूसरा नाम बना सफर
बोले- चार साल पहले मिलीं पांच बसें भी कंडम होने के कगार पर पहुंचीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चार साल से नई बसों का इंतजार कर रहा चंबा डिपो जर्जर और खटारा बसों के सहारे चल रहा है। कागजों में अटकी योजनाएं जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
हर रूट पर बसों के बीच रास्ते में जवाब देने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। यात्रियों के लिए सफर अब सुविधा नहीं, बल्कि अनिश्चितता और डर का दूसरा नाम बन गया है। चालक भी हर दिन जोखिम के साये में ड्यूटी निभा रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि चंबा डिपो की बसें पुरानी और खस्ताहाल हो चुकी हैं। हर दिन किसी न किसी रूट पर बस रास्ते में खराब हो जाती है। इससे यात्रियों को घंटों तक परेशान होना पड़ता है। कई बार वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
चार साल पहले डिपो को पांच बसें मिली थीं। ये भी जर्जर हालत में पहुंच गई हैं। समय पर मरम्मत और देखरेख न होने से ये बसें भी कंडम होने की कगार पर हैं। चालकों का कहना है कि ऐसी बसों को चलाना जोखिम से भरा है। अचानक खराबी से न केवल यात्रा बाधित होती है बल्कि दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। लगातार खराब होती बसों के बीच वे मानसिक दबाव में ड्यूटी करने को मजबूर हैं।
यात्रियों में अमित कुमार, रमन कुमार, अरनव कुमार, सुरजीत कुमार, महिंद्र सिंह, जगदीश कुमार ने बताया कि बीते कई दिनों से कहीं न कहीं बसों के ब्रेक फेल, तकनीकी खराब के मामले सामने आ रहे हैं। सवारियां बाल-बाल बच रही हैं। जब भी सरकारी बसों में बैठते हैं तो यही डर सताता है कि पता नहीं बस कब खराब हो जाए। उन्हें फिर आगे का सफर पैदल तय करना पड़ेगा। कई इलाके ऐसे हैं जहां निजी बसें भी नहीं चलती हैं। लोग सरकारी बसों पर ही निर्भर हैं।
अब तक इन रूटों पर खराब हो चुकी हैं बसें
चंबा-बाट, चंबा-चंबा-अगाहर, उटीप, चंबा-जम्मुहार, चंबा-शिमला, चंबा-चुवाड़ी, चंबा-पठानकोट, चंबा-भड़ेला, डलहौजी-चकोत्तर, चंबा-किहार, चंबा-देहरादून, चंबा-कीड़ी, चंबा-पनेला, चंबा-दिल्ली, चंबा-पुखरी, डलहौजी-मंगलेरा रूटों पर बसें खराब हो चुकी हैं।
एचआरटीसी के डीडीएम शुगल सिंह ने कहा कि हर माह इस बारे में उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। सरकार की ओर से अगर बसें दी जाएगी तभी रूटों पर भेजी जा सकती हैं।