रजिंडू पंचायत में हर दिन पहाड़ों पर चढ़ाई पर जीवन की जंग लड़ रहे ग्रामीण
तीन घंटे पैदल खड़ी चढ़ाई चढ़ पालकी में घर पहुंचाई ऑपरेशन के बाद महिला
लोग बोले- सुरक्षा पहले है, वादे नहीं, सड़क नहीं बनी तो करेंगे चुनाव का बहिष्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
साहो (चंबा)। जिले की रजिंडू पंचायत में हर दिन पहाड़ों पर चढ़ाई नहीं, बल्कि जीवन की जंग लड़ी जाती है। सड़क न होने से मरीजों को पालकी में ढोना रोज का काम बन गया है।
हाल ही में एक महिला को ऑपरेशन के बाद तीन घंटे तक पालकी में उठाकर घर पहुंचाया गया। मरीज का दर्द और ग्रामीणों का पसीना, दोनों ही वादों की राजनीति और अधूरी उम्मीदों की कहानी बयां करते हैं। जंगल और खड़ी पहाड़ी चढ़ाई इस जद्दोजहद को और कठिन बना देती हैं। लोग रोजाना 7 से 10 किलोमीटर पैदल चलते हैं। सर्दियों में बर्फबारी और बारिश से हालात और भी बदतर हो जाते हैं। सड़क न बनने से ग्रामीण चुनाव के बहिष्कार की धमकी तक दे रहे हैं। उनके लिए जीवन और सुरक्षा पहले है, वादे नहीं।
रजिंडू पंचायत के दुर्गम इलाके आज भी सड़क के लिए तरस रहे हैं। बीते दिनों सियूंड मुहाल की एक महिला गुलजार का ऑपरेशन हुआ। उन्हें पालकी में कंधों पर उठाकर तीन घंटे की चढ़ाई चढ़कर घर तक पहुंचाया। ग्रामीण बताते हैं कि मुहाल, कुरील, सियौड़, धमड़ी, खरैडी और परनोटी जैसे गांवों की करीब आठ सौ की आबादी रोजाना सात से दस किलोमीटर पैदल सफर करती है।
पांच साल से सड़क की मांग लंबित है। दो बार सर्वे किए गए लेकिन इससे आगे कार्य नहीं बढ़ा। यह सिर्फ सड़क नहीं, जिंदगियों की लड़ाई है। सड़क का निर्माण काफी जरूरी है। - उत्तम सिंह, पूर्व बीडीसी सदस्य
मरीजों को उठाकर ले जाते जान जोखिम में पड़ जाती है। पांच साल से वादों का सिलसिला जारी है। पहाड़ी की चढ़ाई इतनी कठिन है कि बच्चे और बुजुर्ग कई बार गिर जाते हैं। - मुराद अली, ग्रामीण
सरकार और नेता हमारे बारे में सोचते तक नहीं। घंटों पैदल चढ़ाई चढ़ने के बाद भी मरीज को घर तक ले जाना रोजमर्रा की मजबूरी बन गया है। अगर सड़क नहीं बनी तो चुनाव का बहिष्कार करेंगे। - मूसा खान, ग्रामीण
सड़क नहीं बनी तो चुनाव में वोट नहीं देंगे। जीवन की सुरक्षा पहले है। यह जीवन और सुरक्षा का सवाल बन चुका है। सड़क न बनने पर आने वाले चुनाव का बहिष्कार करने के लिए तैयार हैं। - नाजू ठाकुर, ग्रामीण