खज्जियार (चंबा)। कहने के लिए खज्जियार को मिनी स्विट्जरलैंड का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहां के लोगों को एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से इलाज करवाने के लिए 28 किलोमीटर दूर चंबा जाना पड़ रहा है। आजादी के बाद से यहां लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज दिन तक उनकी यह मांग किसी भी सरकार ने पूरी नहीं की है।
लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवा के नाम पर यहां आयुर्वेदिक की डिस्पेंसरी है। जहां पर प्रतिनियुक्ति पर डॉक्टर की ड्यूटी लगाई जाती है, जो कि सप्ताह में दो या तीन दिन ही वहां उपलब्ध होता है। आज के आधुनिक युग में एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति काफी आगे निकल चुकी है।
उनका कहना है कि गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज एलोपैथिक दवाइयों से कुछ समय में संभव हो सकता है, जबकि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति इसमें अधिक समय ले सकती है। सबसे बड़ी बात यह जिले का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल है, यहां हरेक वर्ष सैकड़ों पर्यटन घूमने के लिए पहुंचते हैं। इस दृष्टि से भी यहां एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होना काफी जरूरी है। यहां पीएचसी खुलने से आसपास की दो अन्य पंचायतों को भी लाभ होगा।
ऐसी कोई सरकार नहीं होगी, जिनसे स्थानीय लोगों ने यहां पीएचसी खोलने की मांग न की हो, लेकिन आज तक सिर्फ उन्हें आश्वासन ही दिए गए। जिसका दंश यहां के लोग भुगत रहे हैं। विपन स्थानीय निवासी
यदि किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए 28 किमी दूर लेकर जाना पड़ता है तो उसके वहां तक जीवित पहुंचने की संभावना भी बहुत कम रह जाती है। विशाल ठाकुर स्थानीय निवासी
यह ऐसा पर्यटन स्थल है जहां पर सीजन पर काफी भीड़ रहती है। ऐसे यदि यहां किसी पर्यटक को चिकित्सीय सेवा की जरूरत पड़ जाए तो उन्हें भी चंबा ही भेजना पड़ेगा। सरोज कुमार स्थानीय निवासी
सरकार और विभाग को यहां पीएचसी खोलने को लेकर गंभीरता दिखाने की आवश्यकता है। तभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यह सेवा मिल सकती है। अंकुश स्थानीय निवासी
ग्रामीण ग्राम सभा में प्रस्ताव पास करके उन्हें देते हैं तो उसे स्वीकृति के लिए सरकार को भेज दिया जाएगा। डॉ. जालम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी