चुराह (चंबा) चुराह उपमंडल की ग्राम पंचायत चरड़ा के ज्यूरी गांव के ग्रामीण जानजोखिम में डाल कर नाला पार करके आवाजाही कर रहे हैं। आलम यह है कि जूरी गांव को आज तक सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा गया है। इसके चलते जूरी गांव के विद्यार्थी नाला पार करके चरड़ा स्कूल पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो आजादी के 75 साल बाद भी जूरी गांव सड़क सुविधा से कोसों दूर है।
बरसात होने पर नाले में पानी अचानक भर जाता है। ऐसे में नाले को पार करना ग्रामीणों के लिए काफी मुश्किल बन गया। ग्रामीणों ने स्वयं जंगल में गिरे पेड़ को नाले के आरपार रख दिया। ग्रामीण इस पेड़ का पुल बनाकर इसके ऊपर से आवाजाही करके चरड़ा और तीसा पहुंच रहे हैं। लकड़ी का पुल कभी भी टूट सकता है। हैरानी की बात है कि गांव के छोटे बच्चे इसी पुल से पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं जिसके अभिभावक भी परेशान रहते हैं।
ग्रामीणों सुखदेव, योगराज, संजीव कुमार, सुरेंद्र कुमार, राजेश कुमार, लालराम आदि ने बताया कि जूरी गांव विधानसभा क्षेत्र चुराह का एक पिछड़ा हुआ गांव है। यहां पर 80 परिवार रहते हैं जिन्हें अपनी दिहाड़ी लगाने के लिए चरड़ा और तीसा जाना पड़ता है। उन्हें लकड़ी का पुल पार करना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, गांव में बीमार व्यक्ति को पीठ पर उठाकर पुल से होकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। इसके अलावा बरसात के समय पानी पुल से ऊपर चढ़ जाता है। इससे आवाजाही करना सुरक्षित नहीं है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग से जूरी गांव को सड़क सुविधा तक जोड़ने की मांग की है।
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता शैलेश राणा ने बताया कि ग्रामीण अपनी जमीन विभाग के नाम नहीं कर रहे हैं। इसके चलते कार्य लटका हुआ है। कहा कि सरकारी भूमि का प्रस्ताव बनाकर वन्य प्राणी विभाग को भेजा गया है।