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नेतागिरी के लिए छोड़ी नौकरी, हाईकमान ने चुनावी टिकट नहीं दिया

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नेतागिरी के लिए छोड़ी नौकरी, नहीं मिला टिकट
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दस सालों में चंबा में चार कर्मचारियों ने सियासत के लिए ठुकरा दी नौकरी
तीन कर्मचारी भाजपा टिकट के तलबगार, एक कांग्रेस टिकट के लिए प्रयासरत
पंकज सलारिया
चंबा। विधानसभा का चुनाव लड़ने की चाह में दस सालों के भीतर जिले के चार कर्मचारियों ने नौकरी को ठुकरा दिया लेकिन उन्हें किस्मत का साथ नहीं मिल पाया।
नौकरी छोड़ चुके इन कर्मचारियों में चुनाव लड़ने की चाह तो भरपूर है लेकिन उन्हें टिकट ही हाथ नहीं लग पाया। तीन कर्मचारियों को जहां भाजपा से खासा लगाव है तो वहीं एक कर्मचारी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखता है।
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विधानसभा चुनावों से पहले यह फेहरिस्त लंबी भी हो सकती है। दरअसल, वर्ष 2012 के विस चुनावों से पहले पशुपालन विभाग में सहायक निदेशक के पद पर सेवाएं दे रहे डॉ. डीके सोनी ने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ली। अभी उनकी डेढ़ साल की नौकरी शेष थी। उन्होंने 2012 में चंबा से भाजपा के लिए टिकट की दावेदारी तो ठोंकी लेकिन भाजपा हाईकमान ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वर्ष 2017 में उन्होंने फिर चुनावी हुंकार भरी। हाईकमान ने एक बार फिर टिकट के लिए उनकी गुजारिश को खारिज कर दिया। मसलन, अंत में आजाद प्रत्याशी के तौर पर उन्होंने चुनाव लड़ने का निर्णय किया लेकिन जीत नहीं पाए। उसके बाद अध्यापक के तौर पर सेवाएं दे रहे विधानसभा क्षेत्र डलहौजी से संबंध रखने वाले अशोक बकारिया ने भी 2017 में विस चुनाव लड़ने के लिए नौकरी छोड़ दी। उन्हें भी टिकट नसीब नहीं हुआ। करीब नौ साल की नौकरी अभी उनकी शेष थी। वर्तमान में भी वह विधानसभा क्षेत्र डलहौजी में काफी सक्रिय दिख रहे हैं। तीसरे विधायक बनने के तलबगार भटियात क्षेत्र से संबंध रखने वाले सतपाल ठाकुर हैं। उन्होंने 2017 में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ली। वह भटियात विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक थे लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं मिल पाया। वह वर्तमान में राजनीति में इतने सक्रिय नहीं हैं। इस फेहरिस्त में चौथा नाम चुराह विधानसभा क्षेत्र से संबंध रखने वाले प्रकाश भूटानी का है जो पुलिस विभाग में कार्यरत थे। उन्होंने 2017 में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए कदमताल शुरू की लेकिन इसे स्वीकृति नहीं मिल पाई। बहरहाल वर्ष 2018 में उन्हें ऐच्छिक सेवानिवृत्ति मिली। उसके बाद वह चुराह विस क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट पाने के लिए काफी सक्रिय दिख रहे हैं। उनकी करीब 17 साल की सरकारी नौकरी अभी शेष थी। कुल मिलाकर राजनीति में पदार्पण करने के लिए संगठन का साथ इन चारों टिकट के तलबगारों को अब तक नहीं मिल पाया है।
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