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Chamba News: चट्टानें गिरने से खाई में गिरी जेसीबी, बीमा कंपनी को 10.04 लाख चुकाने के आदेश

Fri, 02 Oct 2026 09:53 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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जिला उपभोक्ता आयोग ने छह फीसदी ब्याज और 20 हजार रुपये अतिरिक्त देने के भी दिए निर्देश
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तकनीकी आधार पर दावा बंद करना सेवा में कमी माना, तिस्सा-सनवाल मार्ग पर हुआ था हादसा

संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंबा ने जेसीबी मशीन के बीमा दावे से जुड़े मामले में इफको-टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को शिकायतकर्ता को 10,04,791 रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा शिकायत दायर करने की तारीख से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 10 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च भी देने होंगे। आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से तकनीकी आधार पर दावा बंद किए जाने को सेवा में कमी माना है।
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मामला सलूणी निवासी बिमला का है। वह एम/एस साहिल एंटरप्राइजेज की एकमात्र मालिक हैं। उनकी जेसीबी मशीन (एचपी-73ए-6062) का बीमा 22 अगस्त 2023 से 21 अगस्त 2024 तक वैध था। छह अक्तूबर 2023 को तिस्सा-सनवाल मार्ग पर काम के दौरान अचानक पहाड़ी से चट्टानें गिरने लगीं। चालक ने जेसीबी को रोकने के लिए ब्रेक लगाए, लेकिन मशीन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे की सूचना पुलिस और बीमा कंपनी को दी गई।
बीमा कंपनी ने सर्वेयर इंदु भूषण भाटिया को नुकसान का आकलन करने के लिए नियुक्त किया। सर्वेयर ने मशीन को हुए नुकसान का आकलन 10,04,790.88 रुपये किया। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने फिटनेस प्रमाणपत्र, रूट परमिट, रोड टैक्स और वेट स्लिप से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाने का हवाला देते हुए 16 मई 2024 को दावा बंद कर दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने रिकॉर्ड का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि हादसे के समय रोड टैक्स 31 मार्च 2021 तक जमा था। बाद में परिवहन विभाग ने छह अगस्त 2024 को 3,05,097 रुपये एकमुश्त कर के रूप में स्वीकार किए, जिसमें हादसे की तारीख तक की अवधि भी शामिल थी। आयोग ने माना कि हादसा चट्टानें गिरने के कारण हुआ और टैक्स जमा करने में देरी का दुर्घटना से सीधा संबंध नहीं था।
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आयोग ने यह भी माना कि जेसीबी निर्माण उपकरण वाहन की श्रेणी में आती है और हादसे के समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर की पीठ ने 24 सितंबर 2026 को शिकायत स्वीकार करते हुए सर्वेयर की ओर से आंकी गई राशि के आधार पर बीमा कंपनी को भुगतान के आदेश दिए।
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