हिमाचल प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का रविवार से ऐतिहासिक चंबा शहर में भव्य शुभारंभ होगा। सुबह 9 बजे नगर परिषद कार्यालय से बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसकी अगुवाई राज्यपाल कविंद्र गुप्ता करेंगे। यह मेला 26 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित होगा और इसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होंगे।
राज्यपाल करेंगे भगवान को मिंजर अर्पित
परंपरा के अनुसार ऐतिहासिक लक्ष्मीनारायण मंदिर में मिर्जा परिवार द्वारा तैयार की गई मिंजर को राज्यपाल भगवान लक्ष्मीनारायण को अर्पित करेंगे। इसके बाद शोभायात्रा पिंक पैलेस स्थित भगवान रघुनाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मिंजर अर्पित की जाएगी। इसके बाद चौगान मैदान में ध्वजारोहण के साथ आठ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का औपचारिक शुभारंभ होगा।
देशभर में प्रसिद्ध है मिंजर मेला
चंबा का अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला हिमाचल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है। मेले के दौरान लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत, हस्तशिल्प, खेलकूद प्रतियोगिताओं और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। पहले दिन शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में राज्यपाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
क्या है मिंजर मेले का इतिहास?
मान्यता है कि राजा साहिल वर्मन ने अपनी पुत्री राजकुमारी चंपावती की इच्छा पर रावी नदी के किनारे चंबा शहर बसाया था। इसी कारण इस नगर का नाम चंबा पड़ा।
मिंजर मेला कृषि, आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम है। इस पर्व की शुरुआत भगवान रघुवीर और लक्ष्मीनारायण को धान और मक्की की बालियों से बनी मिंजर (मंजरी), नारियल, एक रुपया और ऋतु फल अर्पित कर की जाती है। मेले के समापन पर इस पवित्र मिंजर को रावी नदी में विसर्जित किया जाता है। यह परंपरा अच्छी फसल, समृद्धि और आपसी भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है।